Budget 2026: फेड के रेट नहीं घटाने के बाद RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी बजट 2026 पर निर्भर करेगी

फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का इंटरेस्ट रेट नहीं घटाने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पंसद नहीं आया होगा। भारत में नजरें RBI पर हैं। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 4 से 6 फरवरी तक चलेगी। 6 फरवरी को इसके नतीजे आएंगे

अपडेटेड Jan 29, 2026 पर 3:43 PM
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आरबीआई ने पिछले साल रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट्स (1.25 फीसदी) की कमी की थी।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने जनवरी की मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट नहीं घटाया। फेड ने पिछले साल (2025) में इंटरेस्ट रेट में तीन बार कमी की थी। अभी इंटरेस्ट रेट्स करीब 3.6 फीसदी हैं। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का इंटरेस्ट रेट नहीं घटाने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पंसद नहीं आया होगा। ट्रंप इंटरेस्ट रेट में कमी के लिए पॉवेल पर दबाव बनाते रहे हैं। लेकिन, फेड ने रेट में कमी करने से पहले ग्रोथ और इनफ्लेशन को लेकर तस्वीर और साफ होने तक इंतजार करने का फैसला किया।

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजे 6 फरवरी को

भारत में नजरें RBI पर हैं। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 4 से 6 फरवरी तक चलेगी। 6 फरवरी को इसके नतीजे आएंगे। आरबीआई ने पिछले साल रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट्स (1.25 फीसदी) की कमी की थी। एनालिस्ट्स का मानना है कि फिलहाल भारत में इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद नहीं है। लेकिन, Union Budget 2026 में सरकार के बॉरोइंग प्लान (बाजार से कर्ज लेने का), कैपिटल एक्सपेंडिचर और दूसरे फिस्कल डेटा का असर आरबीआई की अगली मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा।


फरवरी में आरबीआई के इंटरेस्ट रेट घटाने की उम्मीद कम

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज में रिसर्च हेड विनोद नायर का मानना है कि अगली मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा। लेकिन, उन्हें 2026 में कम से एक बार इंटरेस्ट रेट घटने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "इसका समय सरकार की कर्ज की जरूरत और बजट 2026 में तय कैपिटल एक्सपेंडिचर की रफ्तार पर निर्भर करेगा।"

फिस्कल डेफिसिट FY27 में 4.2 फीसदी रह सकता है

मनीकंट्रोल के प्री-बजट पोल के मुताबिक, FY27 में सरकार की ग्रॉस बॉरोइंग 16.5 लाख करोड़ रुपये रह सकती है। ज्यादातर एनालिस्ट्स का मानना है कि फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का करीब 4.2 फीसदी रह सकता है। FY26 के लिए सरकार ने कुल 14.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज (ग्रॉस बॉरोइंग) लेने का टारगेट रखा था, जो जीडीपी का करीब 4.4 फीसदी है। सरकार का फोकस कैपिटल एक्सपेंडिचर पर बना रह सकता है। लेकिन, इसमें वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।

कैपिटल एक्सपेंडिचर FY27 में 9 फीसदी बढ़ सकता है

इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि FY27 में सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 9 फीसदी बढ़ सकता है। इस वित्त वर्ष में सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर 17 फीसदी ज्यादा रहने की उम्मीद है। अगर सरकार का फोकस फिस्कल कंसॉलिडेशन पर रहता है तो बॉन्ड यील्ड्स में स्थिरता आ सकती है, इंफेल्शन कंट्रोल में रह सकता है और लिक्विडिटी ट्रांसमिशन में इम्प्रूवमेंट हो सकता है, जो रेट में कमी का फायदा यूजर्स तक पहुंचाने के लिए जरूरी है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी चिंता की बात

नायर रुपये में कमजोरी को बड़ी चिंता के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुपये में इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज से नीचे ट्रेडिंग हो रही है। साथ ही ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स का रिटर्न अट्रैक्टिव बना हुआ है। जापान में बॉन्ड यील्ड करीब 2-3 फीसदी और अमेरिका में करीब 4 फीसदी है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल यील्ड्स अब भी अट्रैक्टिव बनी हुई है, जिससे इटरेस्ट रेट में ज्यादा कमी की जल्दीबाजी नहीं होनी चाहिए। बाजार उदार मॉनेटरी पॉलिसी की जगह लिक्विडिटी के मामले में लगातार सपोर्ट चाहता है।

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घरेलू स्थितियों पर निर्भर करेगी आरबीआई की पॉलिसी 

एनालिस्ट्स का कहना है कि फेड के रेट नहीं घटाने और ग्लोबल स्थितियां स्टेबल रहने से भारत में मॉनेटरी पॉलिसी पर अब ज्यादातर घरेलू स्थितियों का असर पड़ेगा। अगर बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन के उपाय होते हैं, बॉरोइंग ज्यादा नहीं बढ़ता है और कैपिटल एक्सपेंडिचर का फोकस ग्रोथ पर बना रहता है तो इससे बाद में मॉनेटरी पॉलिसी को और उदार बनाने को लेकर आरबीआई का आत्मविश्वास बढ़ सकता है।

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