पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ग्रोथ अच्छी रही है। दिसंबर 2025 में इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 80 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। इंडस्ट्री का मानना है कि अगर सरकार इनकम टैक्स रिफॉर्म्स जारी रखती है और लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा देती है तो इससे रिटेल इनवेस्टर्स का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। साथ ही डेट फंड्स में इनवेस्टर्स का पार्टिसिपेशन बढ़ाने के उपाय भी जरूरी हैं।
डेट फंड्स के लिए इंडेक्सेशन बेनेफिट्स शुरू होने चाहिए
वीएसआरके कैपिटल के डायरेक्टर स्वप्निल अग्रवाल का कहना है कि एंफी (AMFI) ने सरकार को बजट से अपनी उम्मीदों के बारे में बताया है। पिछले कुछ सालों में टैक्स के नियमों में बदलाव का असर खासकर डेट म्यूचु्अल फंड्स में निवेश पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि डेट फंड्स के लिए इंडेक्सेशन बेनेफिट्स दोबारा शुरू करने की जरूरत है। साथ ही कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों को भी आसान बनाया जाना चाहिए। इससे टैक्स के बाद रिटर्न बढ़ेगा, जिससे लॉन्ग टर्म निवेश के लिए म्यूचुअल फंड्स का अट्रैक्शन बढ़ेगा।
फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स को अट्रैक्टिव बनाने की जरूरत
सरकार ने यूनियन बजट 2023 में इंडेक्सेशन बेनेफिट्स हटा दिया था, जिसका असर डेट फंडों में लंबी अवधि के निवेश पर पड़ा है। वालट्रस्ट के डायरेक्टर और को-फाउंडर राहुल भुटोरिया ने कहा कि पॉलिसी में बदलाव से डेट म्यूचुअल फंड्स का अट्रैक्शन ऐसे वक्त कम हो गया, जब इकोनॉमी को स्टेबल डोमेस्टिक कैपिटल की जरूरत है। अगर डेट म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के पुराने नियमों को फिर से लागू किया जाता है तो परिवारों और एचएनआई कैपिटल की दिलचस्पी फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स में बढ़ेगी। इससे बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी भी बढ़ेगी। इससे कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने में आसानी होगी।
कैपिटल गेंस टैक्स कम करने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा
अग्रवाल ने कहा कि कैपिटस गेंस टैक्स को कम रखने की जरूरत है। इसमें बार-बार बदलाव भी नहीं होना चाहिए। इससे खासकर सिप के जरिए निवेश बढ़ेगा। साथ ही रिटायरमेंट-फोकस्ड प्रोडक्ट्स में भी इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स में राहत के उपायों से लोगों की खर्च करने योग्य इनकम बढ़ी है। अगर सरकार का फोकस इन उपायों पर बना रहता है तो सिस्टमैटिक इनवेस्टिंग को बढ़ावा मिलेगा।
इनवेस्टर्स की जरूरतों को देखते हुए नए प्रोडक्ट्स शुरू करने की सलाह
उन्होंने पेंशन-स्टाइल म्यूचुअल फंड स्कीम, रिटायरमेंट लिंक्ड अकाउंट्स और डेट-आधारित सेविंग्स प्रोडक्ट्स शुरू करने की सलाह दी। इससे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में परिवारों की लॉन्ग टर्म सेविंग्स को मोड़ने में मदद मिलेगी। इससे फिजिकल एसेट्स पर लोगों की निर्भरता बढ़ेगी। साथ ही रिटायरमेंट को लेकर भी उनकी तैयारी बेहतर होगी। अगर मार्केट के लिहाज से देखा जाए तो कैपिटल गेंस के नियमों और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स को आसान बनाने के उपाय होने चाहिए।