Budget 2026: रविवार, 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी। आज यह तारीख बिल्कुल सामान्य लगती है। लेकिन सच यह है कि कुछ साल पहले तक बजट 28 फरवरी को आता था। बजट की तारीख और समय दोनों बदलने के पीछे एक लंबी कहानी है, जो ब्रिटिश दौर से शुरू होकर आज की जरूरतों तक पहुंचती है।
पहले 28 फरवरी को क्यों आता था बजट?
2017 से पहले तक भारत में बजट हर साल फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। यह परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही थी। उस समय सरकार को लगता था कि बजट पेश करने और 1 अप्रैल से उसे लागू करने के लिए इतना वक्त काफी है। लेकिन समय के साथ दिक्कतें सामने आने लगीं। बजट आने और लागू होने के बीच बहुत कम समय मिलता था। राज्यों और मंत्रालयों को नई योजनाओं की तैयारी में परेशानी होती थी। कई बार फाइलें अधूरी रह जाती थीं।
1 फरवरी का फैसला क्यों लिया गया?
इसी परेशानी को देखते हुए 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने बजट को फरवरी की शुरुआत में लाने का ऐलान किया। इससे सरकार और राज्यों को रीब दो महीने का समय मिलने लगा। नई योजनाओं पर काम आसान हुआ। साथ ही, एक तरह से ब्रिटिश काल की पुरानी परंपरा भी खत्म हो गई। तब से हर साल बजट 1 फरवरी को पेश किया जा रहा है।
बजट शाम 5 बजे क्यों नहीं, सुबह 11 बजे?
आज बजट सुबह 11 बजे आता है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। 1999 तक बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। इसकी वजह भी अंग्रेजों का असर था। ब्रिटेन में बजट सुबह 11 बजे आता था, जो भारत में शाम 5 बजे के बराबर होता था। आज़ादी के बाद भी भारत में यही समय चलता रहा।
समय बदलने का फैसला कब हुआ?
1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदला। उनका मानना था कि सुबह बजट आने से सांसदों, एक्सपर्ट और आम लोगों को पूरे दिन बजट समझने और चर्चा करने का मौका मिलेगा। तब से बजट सुबह 11 बजे ही पेश किया जाता है।
रेलवे बजट भी हुआ आम बजट में शामिल
2017 में एक और बड़ा बदलाव हुआ। करीब 92 साल पुरानी परंपरा खत्म कर रेलवे बजट को आम बजट में मिला दिया गया। पहले रेलवे बजट अलग पेश होता था। इस बदलाव से बजट प्रक्रिया आसान हुई और सरकारी खर्च की पूरी तस्वीर एक जगह दिखने लगी।
आखिर ये बदलाव क्यों जरूरी थे?
बजट की तारीख और समय में बदलाव सिर्फ दिखावे के लिए नहीं थे। इसके पीछे कई कारण थे। पहला बजट को समय पर लागू करना। साथ ही राज्यों को तैयारी का वक्त देना और व्यवस्था को ज्यादा व्यावहारिक बनाना।