कैशबैक के नाम पर मिलता है धोखा? छिपे होते हैं कई हिडेन चार्ज, ऑनलाइन पेमेंट में न करें ये गलती

आज की दुनिया में हर कोई ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म पर दिये जाने वाले कैशबैक और डिस्काउंट ऑफर के लालच में आ जाता है। हम अक्सर ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर ऑफर और डिस्काउंट देखते हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों को ऑफर और डिस्काउंट के नाम पर लुभाकर उनके साथ धोखाधड़ी भी करते हैं

अपडेटेड Apr 10, 2024 पर 5:44 PM
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आज की दुनिया में हर कोई ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म पर दिये जाने वाले कैशबैक और डिस्काउंट ऑफर के लालच में आ जाता है।

आज की दुनिया में हर कोई ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म पर दिये जाने वाले कैशबैक और डिस्काउंट ऑफर के लालच में आ जाता है। हम अक्सर ज्यादातर प्रोडक्ट्स पर ऑफर और डिस्काउंट देखते हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों को ऑफर और डिस्काउंट के नाम पर लुभाकर उनके साथ धोखाधड़ी भी करते हैं? सबसे पहले ग्राहक कैशबैक ऑफर देखकर एक तय प्रोडक्ट खरीदता है लेकिन कैशबैक पेमेंट कभी नहीं मिलता।

कैशबैक के झांसे में न आएं

एक हालिया सर्वे से पता चला है कि ज्यादातर ग्राहक कैशबैक और सब्सक्रिप्शन रिवॉर्ड के नाम पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन प्लेटफॉर्म से जुड़ने या उस प्रोडक्ट को खरीदने के बाद पेमेंट नहीं किया जाता है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने 13 टाइप के डार्क पैटर्न, भ्रामक विज्ञापन या अनुचित व्यापार प्रथाओं का नाम दिया जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। इनमें छिपे हुए शुल्क, सब्सक्रिप्शन कैशबैक आदि शामिल हैं।


इन 13 तरीकों से कंपनियां करती है धोखा

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) द्वारा पहचाने गए 13 प्रकार के डार्क पैटर्न में गलत जरूरत, पूरी जानकारी न देना, कंफर्म न करना, फोर्स एक्शन, सब्सक्रिप्शन ट्रैप आदि इसमें शामिल है। लोकलसर्कल्स के सर्वे के अनुसार जिसमें 45,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में 52 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना कि उन्होंने छिपे हुए शुल्क जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। 67 फीसदी यूजर्स को सदस्यता जाल का सामना करना पड़ा है। सर्वे में काफी लोगों ने माना कि उन्हें कई कैशबैक ऑफर्स दी गई लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिला है।

भारत सरकार ने दिसंबर 2023 में ऐसी प्रैक्टिस को अवैध करार दिया और ऐसे डार्क पैटर्न पर फाइन भी लगाया गया। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने साफ तौर पर कहा कि यदि इन डार्क पैटर्न के माध्यम से ग्राहकों को हेरफेर करने या प्रभावित करने का प्रयास किया गया तो ऑनलाइन पेमेंट भुगतान प्लेटफार्म के खिलाफ 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

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