Children’s Mutual Funds: बच्चों के नाम पर निवेश किए जाने वाले म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। ICRA Analytics के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच साल में इस कैटेगरी का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM करीब 160 फीसदी बढ़ा है।
Children’s Mutual Funds: बच्चों के नाम पर निवेश किए जाने वाले म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। ICRA Analytics के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच साल में इस कैटेगरी का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM करीब 160 फीसदी बढ़ा है।
नवंबर 2020 में बच्चों के म्यूचुअल फंड्स का कुल AUM करीब 9,800 करोड़ रुपये था। वहीं, नवंबर 2025 तक यह बढ़कर लगभग 26,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में फोलियो की संख्या भी बढ़कर करीब 32 लाख तक पहुंच गई है।
किस कैटेगरी में आते हैं ये म्यूचुअल फंड?
बच्चों के म्यूचुअल फंड्स, सॉल्यूशन ओरिएंटेड फंड्स की कैटेगरी में आते हैं। ठीक उसी तरह जैसे रिटायरमेंट फंड्स होते हैं।
AUM में वैसे जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इस कैटेगरी में स्कीम्स की संख्या अब भी सीमित है। फिलहाल करीब 12 बच्चों के म्यूचुअल फंड स्कीम्स मौजूद हैं। पांच साल पहले ही इनकी संख्या करीब 10 हो चुकी थी।
ग्रोथ मौजूदा स्कीम्स से ही आई
FinFix Research and Analytics की फाउंडर प्रबलीन बाजपेयी के मुताबिक, इस कैटेगरी में जो ग्रोथ देखने को मिली है, वह ज्यादातर मौजूदा स्कीम्स से ही आई है।
उनका कहना है कि पिछले पांच साल में सिर्फ दो नई स्कीम्स लॉन्च हुई हैं। इससे यह साफ होता है कि बच्चों के म्यूचुअल फंड्स को लेकर निवेशकों की जागरूकता अभी धीरे-धीरे ही बढ़ रही है।
तीन बड़ी स्कीम्स में सिमटा ज्यादातर पैसा
प्रबलीन बाजपेयी का कहना है कि इस कैटेगरी के कुल AUM का करीब 78 फीसदी हिस्सा सिर्फ तीन बड़ी स्कीम्स में केंद्रित है।
इन फंड्स में आमतौर पर पांच साल या बच्चे के 18 साल का होने तक (जो भी पहले हो) का लॉक-इन पीरियड होता है। उनका कहना है कि यह लॉक-इन बच्चों की पढ़ाई जैसे लंबे समय के लक्ष्यों के लिए निवेश में अनुशासन बनाए रखने में मदद करता है।
फंड की रणनीति पर निर्भर करता है रिटर्न
बच्चों के म्यूचुअल फंड्स का रिटर्न उनकी निवेश रणनीति पर निर्भर करता है। कुछ स्कीम्स फ्लेक्सी-कैप अप्रोच अपनाती हैं, जबकि कुछ हाइब्रिड फंड्स जैसी रणनीति पर चलती हैं।
शो में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस कैटेगरी में औसतन तीन से पांच साल की CAGR रिटर्न 20 फीसदी से 30 फीसदी के बीच रही है। रिटर्न का स्तर इस बात पर निर्भर करता है कि फंड का इक्विटी में कितना एक्सपोजर है।
एक साल के रिटर्न से तुलना करने से बचें
प्रबलीन बाजपेयी निवेशकों को एक साल के रिटर्न के आधार पर तुलना करने से बचने की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि इक्विटी निवेश को हमेशा कम से कम पांच साल या उससे ज्यादा की अवधि में देखना चाहिए।
खास बात यह है कि भारत में शिक्षा से जुड़ी महंगाई दर करीब 10 से 12 फीसदी मानी जाती है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए निवेश करते समय लंबी अवधि का नजरिया बेहद जरूरी हो जाता है।
बच्चों के फंड बनाम खुद का पोर्टफोलियो
हालांकि माता-पिता चाहें तो फ्लेक्सी-कैप या हाइब्रिड फंड्स के जरिए खुद भी बच्चों के लिए ऐसा पोर्टफोलियो बना सकते हैं, लेकिन बच्चों के म्यूचुअल फंड्स की अपनी एक खासियत है।
ये फंड्स लक्ष्य आधारित निवेश और मजबूरी वाला अनुशासन देते हैं, क्योंकि इनमें लॉक-इन होता है। इससे निवेश बीच में तोड़ने की संभावना कम हो जाती है।
इस कैटेगरी की प्रमुख स्कीम्स
बच्चों के म्यूचुअल फंड्स की इस कैटेगरी में कुछ लोकप्रिय स्कीम्स ये हैं:
आगे कैसा रहेगा बच्चों के फंड्स का भविष्य
अगर निवेशकों में जागरूकता और बढ़ती है और ज्यादा फंड हाउस इस सेगमेंट में आते हैं, तो बच्चों के म्यूचुअल फंड्स की यह कैटेगरी आने वाले समय में स्थिर और लगातार ग्रोथ दिखा सकती है।
लंबी अवधि के लक्ष्यों, खासकर बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, यह कैटेगरी निवेशकों के लिए एक अहम विकल्प बनती जा रही है।
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