Nexperia chips export: चीन ने Nexperia चिप्स पर लगाए गए एक्सपोर्ट कंट्रोल में ढील देने का फैसला किया है। यह छूट सिर्फ सिविलियन यानी नॉन-डिफेंस इस्तेमाल वाली चिप्स के लिए होगी। यह कदम दुनिया भर के कार निर्माता और ऑटो पार्ट सप्लायर्स के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि Nexperia ऑटो इलेक्ट्रिकल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले बेसिक चिप्स की बड़ी सप्लायर है।
डच सरकार की कार्रवाई और सप्लाई संकट
Nexperia नीदरलैंड्स में स्थित कंपनी है, लेकिन इसका मालिकाना हक चीनी कंपनी Wingtech के पास है। 30 सितंबर को डच सरकार ने कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। उनका आरोप था कि Nexperia की यूरोपीय मैन्युफैक्चरिंग को Wingtech चीन शिफ्ट करना चाहती है, जो यूरोप की आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) के लिए खतरा है।
इसका जवाब चीन ने सख्त तरीके से दिया और कंपनी के फिनिश्ड चिप्स का एक्सपोर्ट रोक दिया। इनमें से ज्यादातर चिप्स चीन में ही पैकेज होते हैं। इससे ग्लोबल ऑटो सेक्टर में सप्लाई की दिक्कत बढ़ गई।
सिविलियन यूज पर छूट, लेकिन स्पष्टता नहीं
चीन ने यह नहीं बताया कि वह किन चिप्स को ‘सिविलियन यूज’ मानता है। हालांकि, इस घोषणा से पहले जर्मनी और जापान की कई कंपनियों ने बताया कि उन्हें चीन से Nexperia चिप्स की सप्लाई दोबारा मिलनी शुरू हो गई है। यह संकेत है कि बीजिंग धीरे-धीरे सप्लाई प्रेशर कम कर रहा है।
चीन-नीदरलैंड्स रिश्तों में तनाव बरकरार
एक्सपोर्ट में ढील के बावजूद, Nexperia की ओनरशिप और ऑपरेशंस को लेकर यूरोप और चीन में तनाव अभी भी बना हुआ है। चीन का कहना है कि वह ग्लोबल चिप सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि नीदरलैंड्स ने विवाद को सुलझाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए
रविवार को जारी बयान में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने EU से यह भी कहा कि वह डच सरकार पर दबाव बढ़ाए ताकि Nexperia को जब्त करने का फैसला वापस लिया जाए।
अमेरिका-चीन बैठक के बाद नरमी आई
पिछले हफ्ते चीन ने छूट के लिए आवेदन स्वीकार करना शुरू किया था। यह फैसला तब आया जब 30 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई।
चिप सेक्टर में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव इस विवाद को और जटिल बना रहा है, लेकिन चीन की यह छूट फिलहाल ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री के लिए राहत लेकर आई है।