5 रुपये का मोटा सिक्का अचानक बाजार से हो गए गायब, तस्करों ने ऐसे की बंपर कमाई

5 Rupees Coin: बाजार में पहले 5 रुपये का मोटा सिक्क दिखाई देता था। इसे देखकर ऐसे लगता था कि 2 सिक्कों को जोड़कर बनाया गया है। इन 5 रुपये के पुराने वाले मोटे सिक्के की मेटल वैल्यू उसकी सर्फेस वैल्यू से ज्यादा थी। इसकी भनक तस्करों को लग गई। इसके बाद बड़े स्तर पर इन सिक्कों को तस्करी कर बांग्लादेश ले जाया जाने लगा था

अपडेटेड Mar 06, 2023 पर 9:22 AM
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एक सिक्के से 6 ब्लेड बन जाती थी और एक ब्लेड 2 रुपये में बिकती थी

5 Rupees Coin: भारत में सिक्कों का इतिहास बेहद पुराना है। ब्रिटिशकाल से पहले से ही भारत में सिक्के प्रचलन में हैं। मौजूदा समय में भारतीय करेंसी में नोट और सिक्के चलते हैं। आपने देखा होगा कि 5 का सिक्का कई तरह का होता है। एक पुराने वाला मोटा सिक्का होता है और एक इसके बाद आया सुनहरे रंग का पतला सिक्का। पिछले कुछ समय में आपने इस बात पर जरूर गौर किया होगा कि 5 रुपये के पुराने मोटे सिक्के आने बंद हो गए हैं। आसान शब्दों में कहें तो पुराने 5 रुपये के सिक्के पिछले कई सालों से बनने बंद हो गए हैं। बाजार में जो सिक्के बचे हैं, वही चल रहे हैं।

लेकिन, क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया गया? क्यों इन सिक्कों के बंद करके नई तरह के सिक्के बनाए गए? दरअसल, इसके पीछे एक बहुत बड़ी वजह थी। आइए जानते हैं वो वजह क्या थी...

सिक्कों के बनते थे ब्लेड


5 रुपये के पुराने सिक्के काफी मोटे होते थे। इनको बनाने में ज्यादा मेटल लगती थी। ये सिक्के जिस धातु से बनते थे। दाढ़ी बनाने वाला धारदार ब्लेड भी उसी मेटल से बनाया जाता है। इस वजह से लोगों ने इसका गलत फायदा उठाना शुरू कर दिया। ज्यादा मेटल होने की वजह से इन सिक्कों को बांग्लादेश में तस्करी होने लगी। वहां इन सिक्कों को पिघलाकर इनकी मेटल से ब्लेड बनाया जाने लगा। एक सिक्के से 6 ब्लेड बन जाती थी। एक ब्लेड 2 रुपये में बिकती थी। इस तरह एक 5 रुपये के सिक्के को पिघलाकर उससे ब्लेड बनाकर 12 रुपये में बेचा जा सकता था। ऐसे में तस्करी करने वाले लोग मोटी कमाई कर रहे थे।

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सरफेस वैल्यू से ज्यादा थी इसकी मेटल वैल्यू

किसी भी सिक्के की कीमत दो तरह से होती है। पहली होती है सरफेस वैल्यू और दूसरी होती है मेटल वैल्यू। सरफेस वैल्यू का मतलब वो होता है, जो सिक्के पर लिखी रहती है। जैसे 5 के सिक्के पर 5 लिखा होता है और मेटल वैल्यू होती है उसको बनाने के लिए इस्तेमाल हुई मेटल की कीमत। इस तरह 5 के पुराने वाले सिक्के को पिघलाने पर उसकी मेटल वैल्यू, सरफेस वैल्यू से ज्यादा थी। जिसका फायदा उठा कर उससे ब्लेड्स बनाए जाने लगे।

RBI ने लिया फैसला 

जब मार्केट में सिक्के कम होने लगे और इसकी भनक सरकार को लगी तो भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 रुपये के सिक्कों को पहले के मुकाबले पतला कर दिया। इसके साथ ही इसको बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मेटल को भी बदल दिया। ताकि बांग्लादेशी इनसे ब्लेड ना बना सकें।

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