इन दिनों फेस्टिव सीजन चल रहा है। बहुत से लोग कुछ न कुछ खरीदने की तैयारी कर रहे होंगे। ऐसे में अगर आप कार खरीदने की सोच रहे हैं। लेकिन पैसों की कमी से नहीं खरीद पा रहे हैं तो लोन लेकर अपना सपना पूरा कर सकते हैं। ऐसे में बहुत से लोग यह सोचते हैं कि आखिर कौन सा लोन लिया जाए। कार लोन लें या फिर पर्सनल लोन लें। बहुत से लोग हैं कार खरीदने के लिए पर्सनल लोन ले लेते हैं।
जानकारों का मानना है कि पर्सनल के बदले कार लोन लेना कई मायनों में बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। पर्सनल के मुकाबले कार लोन सस्ता पड़ता है। कार लोन में गाड़ी को ही सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी रखा जाता है। वहीं पर्सनल लोन में कुछ भी गिरवी नहीं रखना होता है।
जानिए पर्सनल लोन और कार लोन में अंतर
पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loan) होता है। जबकि कार लोन एक सिक्योर्ड लोन (secured loan) है। कार लोन में कार बैंक के पास तब तक गिरवी रहती है, जब तक उसका लोन पूरी तरह से नहीं चुका दिया जाता है। पर्सनल लोन देते समय कोई भी वित्तीय संस्थान अप्लाई करने वाले शख्स की मंथली इनकम और क्रेडिट स्कोर जैसी बातों पर ध्यान देते हैं। जबकि कार लोन देते समय इन बातों के अलावा व्हीकल की कीमत पर भी गौर किया जाता है।
अगर 15 लाख रुपये की कार खरीदना चाहते हैं, तो बैंक इस कीमत के 80-90 फीसदी के बराबर लोन आसानी से मुहैया कराते हैं। लेकिन इसके लिए किश्त चुकाने की क्षमता होनी चाहिए। वहीं आप पर्सनल लोन लेना चाहते हैं तो बैंक या वित्तीय संस्थान के पास सिक्योरिटी के तौर पर कुछ नहीं होता। उन्हें सिर्फ आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और लोन चुकाने की क्षमता यानी आमदनी को देखकर ही लोन देना होता है।
पर्सनल लोन के मुकाबले कार लोन सस्ता
आमतौर पर वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन पर ज्यादा ब्याज लेते हैं। इसके मुकाबले कार लोन पर ब्याज दर कम होती है। पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड होने केचलते काफी महंगा साबित होता है। इन दोनों में से किसी भी लोन के लिए अप्लाई करने से पहले दोनों की ब्याज दरों की तुलना जरूर कर लेनी चाहिए। जहां से भी आप लोन ले रहे हैं, उनके नियम शर्तों को सावधानी पूर्वक पढ़ लेना चाहिए।