क्रूड ऑयल की कीमतों में 6 मई को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिका-ईरान में जल्द डील की उम्मीद है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में संकेत दिया है। इसका असर शेयर बाजारों पर दिखा। दोपहर बाद सेंसेक्स 1000 अंक तक चढ़ गया। उधर, क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। सवाल है कि क्या क्रूड में बड़ी गिरावट से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेगी?
क्रूड आयल की कीमतों में बड़ी गिरावट
ब्रेंट क्रूड का भाव 6 मई को दोपहर बाद क्रैश कर गया। यह 7 फीसदी गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव तो 7 फीसदी से ज्यादा गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। उधर, सोने और चांदी में बड़ी तेजी देखने को मिली। ट्रंप ने ईरान को लेकर रुख में नरमी दिखाई है। अमेरिकी सरकार ने कहा है कि 'Operation Epic fury' पूरा हो गया है। इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई अब खत्म हो सकती है।
OMC ने नॉर्मल पेट्रोल-डीजल महंगे नहीं किए
सवाल है कि क्या क्रूड में बड़ी गिरावट से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी? चार राज्यों में विधानसभा चुनावों के पूरा होने के बाद यह माना जा रहा है कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई के दो महीने बाद भी सरकारी ऑयल कंपनियों ने नॉमर्ल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।
ऑयल कंपनियों को हो रहा बड़ा नुकसान
सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 25 रुपये से ज्यादा नुकसान हो रहा है। इसकी वजह यह है कि 28 फरवरी को क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल था, जो बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था। लेकिन, ऑयल कंपनियां पुराने रेट्स पर ही पेट्रोल और डीजल बेच रही है। इससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है।
IMF ने कीमतों में बढ़ोतरी को जरूरी बताया
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें जल्द नहीं बढ़ाती हैं तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा। हाल में IMF ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को जरूरी बताया है। उसने कहा है कि जिस तरह से क्रूड की कीमतें बढ़ी है, उसे देखते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लंबे समय तक स्थिर नहीं रखा जा सकता।
क्रूड में गिरावट के बावजूद महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल
क्रूड की कीमतें भले ही 6 मई को 7 फीसदी तक गिरी हैं। लेकिन, यह अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब हैं। यह मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने से पहले की कीमत से करीब 50 फीसदी ज्यादा है। ऑयल कंपनियों के लिए क्रूड की बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ लंबे समय तक बर्दाश्त करना मुमकिन नहीं है। इसका मतलब है कि क्रूड में गिरावट के बावजूद सरकारी ऑयल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।