Navi ने PAN data के साथ लोन ऑफर करके यूजर्स को चिंता में डाला, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पर्सनल डाटा की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, एक्सपर्ट्स ने कहा- लोगों को थर्ड पार्टी वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशंस को अपने पर्सनल जानकारी के इस्तेमाल पर सहमति देने से बचना चाहिए
MoneyControl News
अपडेटेड Dec 21, 2021 पर 2:47 PM
पैन कार्ड सहित पर्सनल डाटा की सुरक्षा को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं
3 दिसंबर को नई दिल्ली के एक मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव 38 वर्षीय रोहित कुलकर्णी (नाम बदल दिया गया है) को एक टेक्स्ट मैसेज मिला। मैसेज में लिखा था : “डियर रोहित, बधाई हो! आपका पैन नावी से 5 लाख रुपये तक के प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन के लिए इलिजिबिल है। अभी अप्लाई करें (उसके बाद एक लिंक दिया गया था)।”
पहली नजर में, कुलकर्णी वह स्पैम लगा- जिसके माध्यम कुछ बेचने की कोशिश हो रही थी। आश्चर्य की बात नहीं थी, वह ऐसे अनचाहे मैसेजे का आदी था। फिर कुलकर्णी को इस मैसेज में कुछ असामान्य बात दिखी : वह था उसका परमानेंट अकाउंट नंबर (पीएएन)। और यह मास्क्ड नहीं था यानी छिपाया नहीं गया था।
हैरत में पड़े कुलकर्णी ने सोचा, “कैसे कोई कंपनी किसी व्यक्ति को उसके पैन कार्ड की डिटेल के साथ एसएमएस भेज सकती है?” यहां तक कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भी पैन डिटेल्स को छिपाकर मैसेज भेजता है।
नावी द्वारा इस तरह पैन डिटेल्स के साथ मैसेज भेजने की कई शिकायतें ट्विटर पर आई हैं। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रिया को देखकर डिजिटल लेंडिंग कंपनी नावी ने इस तरह के टेक्स्ट मैसेज भेजने बंद कर दिए है। नावी ने मनीकंट्रोल के सवाल पर कोई प्रतिक्रया नहीं दी, जिसमें पूछा गया था कि उसे पैन और फोन डाटा कहां से मिला।
निश्चित रूप से नावी ऐसी पहली कंपनी नहीं है, जिसे इस तरह फोन नंबर और पैन डाटा मिला है। हालांकि, इस तरह की एग्रेसिव सेलिंग से यूजर्स की पर्सनल डाटा की सुरक्षा से जुड़ी खामियां सामने आती रहती हैं।
कई रियल एस्टेट कंपनियां, शेयर ब्रोकर और क्रेडिट कार्ड कंपनियां लगातार संभावित कस्टमर्स को टेक्स्ट मैसेज या कॉल करते रहे हैं। ऐसी कंपनियां प्रोडक्ट्स की बिक्री करती हैं, कस्टमर्स को लुभाने के लिए कम ब्याज पर लोन की पेशकश करती हैं और छूट या कैशबैक स्कीम्स की पेशकश करती हैं।
हालांकि, नावी के मामले में पैन के लीकेज से जुड़ी समस्या थी। सवाल यह उठता है कि पर्सनल डाटा कितना सुरक्षित है और इसे सुरक्षित करने के लिए क्या कर सकते हैं?
नावी टेक्नोलॉजिस एक नई पीढ़ी की फिनटेक कंपनी है, जिसे फ्लिपकार्ट के पूर्व कोफाउंडर सचिन बंसल और उनके कॉलेज के दोस्त अंकित अग्रवाल ने वर्ष 2018 में शुरू किया था। इस कंपनी के पास नावी म्यूचुअल फंड का स्वामित्व है, जिसका नाम बाद में एस्सेल म्यूचुअल फंड हो गया था। इसके बिजनेस में लेंडिंग, जनरल इंश्योरेंस और माइक्रोफाइनेंस शामिल है। नावी ने एक यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए भी आवेदन किया है।
पूर्व में मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बंसल ने कहा था कि नावी का लक्ष्य 20 मिनट से कम वक्त में कर्ज देने का है।
कुलकर्णी ने कहा, उन्हें याद नहीं है कि उन्होंने कभी किसी सेवा के लिए नावी के साथ पंजीकरण कराया है। न ही उन्होंने नावी का ऐप इंस्टाल किया। फिर भी नावी के पास उनका सही पैन, नाम और मोबाइल नंबर है। ट्विटर पर अन्य यूजर्स ने भी नावी के मामले में इसी तरह की शिकायतें की हैं।
नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक डिजिटल लेंडिंग कंपनी के कोफाउंडर ने कहा, “संभवतः नावी को एक थर्ड पार्टी से पर्सनल जानकारियां मिली होंगी। इन दिनों कस्टमर्स की पर्सनल जानकारियां आसानी से उपलब्ध हैं।” उन्होंने कहा कि फिनटेक कंपनी को अपने मार्केटिंग कैंपेन के लिए डाटाबेस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कुलकर्णी ने संदेह जताया कि उन्हें नवंबर के मध्य में एक निजी बैंक की वेबसाइट के माध्यम से क्रेडिट स्कोर रिपोर्ट के लिए अप्लाई किया था, संभवतः वहीं से उनका डाटा लीक हुआ होगा।
हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, ऐसी संभावना कम है कि क्रेडिट ब्यूरो किसी की पर्सनल जानकारी दूसरी इकाइयों के साथ साझा की हो।
एक क्रेडिट ब्यूरो के कंट्री हेड ने कहा, “बिना जानकारी या सहमति के कोई भी किसी कंज्यूमर का डाटा इस्तेमाल नहीं कर सकता है। क्रेडिट ब्यूरो किसी के पर्सनल डाटा को थर्ड पार्टी के साथ शेयर नहीं करता है।”
बैंक बाजार, पैसाबाजार और सीआरईडी जैसी लोन एग्रीगेटर वेबसाइट और फिनटेक कंपनियां साल भीर मुफ्त में क्रेडिट स्कोर रिपोर्ट देती हैं। क्रेडिट रिपोर्ट के लिए अप्लाई करने से पहले उनकी शर्तों को पढ़ना जरूरी है।
डिजिटल फुटप्रिंट कम करें
अक्सर लोग अपने डिजिटल फुटप्रिंट और पर्सनल डिटेल्स ऑनलाइन छोड़ देते हैं, जिससे फिनटेक लेंडर्स को उनकी लोन इलिजिबिलिटी का आकलन करने और फिर उन्हें लोन ऑफर करने में मदद मिलती है। माईमनीमंत्रआ के फाउंडर राज खोसला ने कहा, “ऐसी संभावना है कि आपने अपनी डिटेल्स शॉपिंग वेबसाइट पर डाली हो या फेस्टिव सीजन के दौरान एक रिटेल शॉप से ईएमआई पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदे हों। ईएमआई पर खरीदारी के दौरान आपको अपनी पैन कार्ड और पर्सनल डिटेल देनी होती है।”
फिनटेक लेंडर्स अपना डाटाबेस तैयार करने के लिए शॉपिंग वेबसाइट्स और रिटेलर्स से डाटा हासिल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल फुटप्रिंट्स कम करने से पर्सनल डाटा लीक होने और आपकी जानकारी का दुरुपयोग होने की संभावनाएं कम हो जाएंगी।