ऑनलाइन इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रो को अपने प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग की सुविधा ऑफर करने का लाइसेंस मिल गया है। कंपनी ने यह जानकारी दी है। हालांकि, अभी यह फीचर टेस्टिंग फेज में है। टेस्टिंग पूरी होने और रेगुलेटरी एवं ऑपरेशन से जुड़े प्रोसेसेज पूरे होने के बाद ब्रोकरेज फर्म अपने इनवेस्टर्स के लिए यह सुविधा शुरू करेगी।
ग्रो के प्लेटफॉर्म के जरिए मिलेगी यूएस स्टॉक्स में निवेश की सुविधा
इस लाइसेंस से विदेश में निवेश की सुविधा ऑफर करने की ग्रो की कोशिशों को मजबूती मिली है। एक बार ग्रो के इस फीचर के शुरू होने के बाद भारत में इनवेस्टर्स ब्रोकरेज फर्म के प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिका की लिस्टेंड कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकेंगे। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि उसका यह फीचर कब तक शुरू होगा।
अमेरिकी शेयरों में निवेश LRS सहित दूसरे नियमों के तहत होगा
इस सुविधा के शुरू होने के बाद ग्रो के क्लाइंट्स उसके ऐप के जरिए भी सीधे अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकेंगे। यह निवेश आरबीआई सहित सभी रेगुलेटर्स के नियमों के तहत होगा। खासकर इस पर आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) की गाइडलाइंस और दूसरे नियम लागू होंगे।
यूएस टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बढ़ी है निवेशकों की दिलचस्पी
ग्रो को यह लाइसेंस ऐसे वक्त मिला है, जब अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में भारतीय निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। भारतीय इनवेस्टर्स खासकर अमेरिकी टेक्नोलॉजी और चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं। इसकी वजह इन कंपनियों के शेयरों में आई जबर्दस्त तेजी है।
पिछले महीने इन ब्रोकरेज फर्मों को गिफ्ट सिटी के जरिए निवेश की मिली थी इजाजत
पिछले महीने Zerodha, Groww, Angel One और Upstocks को अमेरिका सहित विदेशी कंपनियों के शेयरों में गिफ्ट सिटी के जरिए इनवेस्टमेंट की सुविधा ऑफर करने की मंजूरी मिली थी। लेकिन, इस सर्विस के शुरू होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है। इसकी वजह यह है कि ब्रोकरेज फर्मों को इसके लिए टेस्टिंग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और कंप्लायंस जैसे प्रोसेसेज पूरे करने होंगे।
अभी इनवेस्टर्स म्यूचुअल फंड्स की स्कीम के जरिए करते हैं निवेश
अभी विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश में दिलचस्पी रखने वाले भारतीय इनवेस्टर्स म्चूयुअल फंड की विदेशी स्कीम में निवेश करते हैं। कई म्यूचुअल फंड्स की ऐसी स्कीमें मार्केट में उपलब्ध हैं। लेकिन, उनके विदेश में निवेश की सीमा तय है। निवेश तय सीमा तक पहुंचने के बाद ये स्कीमें निवेशकों से नया निवेश लेना बंद कर देती हैं।