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Loan App: ऑनलाइन लोन ऐप्स से जुड़े इन खतरों को जानें, धोखाधड़ी के जाल में फंसने से बचें

Risks in Digital Lending: अगर आप मोबाइल ऐप के जरिए कर्ज लेने की तैयारी में है, तो सबसे पहले इससे जुड़े सभी जोखिमों को जानें। इसके बाद ही लोन के लिए आगे बढ़े। लोन देने वाले ऐप को इंस्टॉल करने से पहले यूजर्स के रिव्यू को पढ़ें। साथ ही उसकी प्रॉसेसिंग फीस और दूसरी शर्तों के बारे में भी पहले ही पता कर लें

Curated By: Vikrant singhअपडेटेड Jan 24, 2023 पर 8:02 PM
Loan App: ऑनलाइन लोन ऐप्स से जुड़े इन खतरों को जानें, धोखाधड़ी के जाल में फंसने से बचें
ऑनलाइन मोबाइल ऐप्स के जरिए लोन से पहले इससे जुड़े खतरों को जानना बेहद जरूरी है

कोरोना महामारी के बाद से ही लोन देने वाले ऐप के जरिए डिजिटल फ्रॉड या धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं। इन्हें 'लेंडिंग ऐप' कहते हैं। ये लेडिंग ऐप जरूरतमंद यूजर्स को तुरंत कुछ ही मिनटों के अंदर कर्ज मुहैया कराते हैं। हालांकि इन ऐप्स के साथ कई तरह के खतरे या जोखिम भी जुड़े है। फिनटेक इंडस्ट्री में मौजूद इन्हीं जोखिमों को पहचानने के लिए हाल ही में एक 'फिनटेक लेंडिंग रिस्क बैरोमीटर' लॉन्च किया गया है। इस बैरोमीटर को फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (फेस) और सेंटर फॉर फाइनैशियल इन्क्लूजन (सीएफआई) ने मिलकर लॉन्च किया है। इस रिस्क बैरोमीटर का उद्देश्य ऑनलाइन लेंडिंग इंडस्ट्री में उभरते जोखिमों को पहचनाने का एक बेसलाइन तैयार करना है।

लेंडिंग ऐप से जुड़े जोखिमों को पहचनाने के लिए इस बैरोमीटर कई तरह के मिश्रित तरीकों को अपनाने के बाद लॉन्च किया गया था। सबसे पहले, इसके लिए करीब 40 लेंडिंग ऐप के बीच एक सर्वे कराया गया। ये सर्वे सितंबर से अक्टूबर 2022 के बीच हुआ था। सर्वे का मकसद लेंडर्स और गैर-लेंडर्स के बीच जोखिमों को लेकर शुरुआती धारणाओं का जुटना था। फिर सर्वे में शामिल लोगों के साथ एक विस्तृत इंटरव्यू किया गया। प्रतिभागियों को प्रत्येक जोखिम को 1 से 7 नंबर के पैमाने पर रैंक करना था। इसमें 1 सबसे कम गंभीर जोखिम और 7 सबसे अधिक गंभीर जोखिम था। आइए जानते हैं कि डिजिटल लेंडिंग से जुड़े 5 सबसे बड़े खतरे क्या हैं?

1. विश्वसनीयता की कमी

सर्वे में शामिल 90% प्रतिभागियों ने कहा कि सबसे बड़ा जोखिम लेंडिंग ऐप्स की ओर से बेईमानी का है। इसे 7 में 6.3 स्कोर मिला। कई लेंडिंग ऐप अनरजिस्टर्ड हैं और ये प्रॉसेसिंग फीस के नाम पर काफी ज्यादा पैसे ले रहे हैं। साथ ही ये अपनी टर्म और कंडीशन भी नहीं बताते और वसूली के लिए आक्रामक तरीके अपनाते हैं। ऐसे ऐप्स यूजर्स को नुकसान पहुंचाते हैं और डिजिटल लेंडिंग में उनके विश्वास को कम करते हैं। डिजिटल लेंडिंग पर बनी एक आरबीआई वर्किंग ग्रुप ने पाया कि एंड्रॉयड यूजर्स के लिए करीब 1,000 लेंडिंग ऐप उपलब्ध हैं, जिसमें से करीब 600 अवैध थे।

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