इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2023 (India Mobile Congress 2023) में, रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने भारत में स्पेसफाइबर नाम की अपनी सैटेलाइट बेस्ड गीगाबिट इंटरनेट सर्विस को पेश किया। इस सर्विस को भारत के दूरदराज की जगहों को इंटरनेट सेवाओं से जोड़ना है। ये वह इलाके हैं जहां पर इससे इंटरनेट सर्विस को जोड़ना लगभग असंभव सा था। हालांकि रिलायंस की तरफ से इस सर्विस को शुरू करने में थोड़ा सा वक्त भी लगा है और इस पर काफी काम भी किया गया है। इसके अलावा कई सारे एक्सपर्ट्स इस सर्विस की तुलना दुनिया के सबसे बड़े अमीर एलॉन मस्क के SpaceX स्टारलिंक से भी कर रहे हैं। ऐसे में आइये इससे संबंधित हर एक तरह की जानकारी भी हासिल कर लेते हैं।
Jio ने गीगाबिट इंटरनेट देने के लिए SES के साथ की है साझेदारी
स्पेसफाइबर के लॉन्च की सुविधा के लिए, Jio ने दुनिया की लेटेस्ट मीडियम अर्थ ऑर्बिट (MEO) तक अपनी पहुंच हासिल करने के लिए SES के साथ साझेदारी की है। ऐसा माना जा रहा है कि यह अकेला ऐसा MEO है जो गीगाबिट अंतरिक्ष से फाइबर जैसी सेवाओं को डिलीवर कर सकता है। खास तौर पर यह जियो को उस स्थिति में जहां उसकी SES के O3b और O3b mPOWER सैटेलाइट तक पहुंच है। हालांकि इस साझेदारी की शुरुआत साल 2022 में ही हो गई थी। साल 2022 में Jio ने सैटेलाइट के जरिएल भारत में सस्ती ब्रॉडबैंड सर्विस देने के लिए SES के साथ Jio स्पेस टेक्नोलॉजी लिमिटेड नाम से एक जॉइंट वेंचर का ऐलान किया था।
ऐसा करने वाली दुनिया की पहली कंपनी
कई सारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दुनिया की पहली कंपनी है जो न केवल दो ऑर्बिट्स में सैटेलाइट्स को ऑपरेट करने बल्कि उनका कॉमर्शियल इस्तेमाल करने में भी कामयाब रही है। इसने अलग अलग दो ऑर्बिट्स में 70 से भी ज्यादा सैटेलाइट्स को लॉन्च किया है। इन ऑर्बिट्स के जरिए दुनिया भर के लाखों यूजर्स को इंटरनेट फैसेल्टी उपलब्ध कराई जा रही है।
इन जरूरतों को पूरा करेगा Jio Fiber
Jio का दावा है कि स्पेसफाइबर की शक्ति को दिखाने के लिए शुरुआत में "भारत के चार सबसे दूर दराज की जगहों को चुना गया। इन इन जगहों में गुजरात में गिर, छत्तीसगढ़ में कोरबा, ओडिशा में नबरंगपुर और असम में ओएनजीसी-जोरहाट शामिल हैं। इस सेवा को पूरे भारत में फैलाया जाएगा। हालांकि फिलहाल इस बारे में अभी और भी ज्यादा जानकारी आना बाकी है। Jio ने यह भी कहा कि यह सर्विस "मोबाइल बैकहॉल के लिए ज्यादा क्षमता" के साथ काम करेगी और देश के दूरदराज के हिस्सों में Jio True5G की उपलब्धता और पैमाने में सुधार करेगी। सेवा शुरू करने के लिए, Jio को स्पेस टेक्नोलॉजी से ब्रॉडबैंड को लागू करने के मद्देनजर दूरसंचार विभाग (DoT) से मंजूरी लेनी पड़ी। उन्हें सितंबर 2022 में वही मंजूरी मिली।
जियो स्पेसफाइबर, जियो फाइबर और एयरफाइबर से कैसे अलग है?
जियो फाइबर के ठीक उलट, स्पेसफाइबर तकनीक वायरलेस है और इसमें आपके घर में कोई फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड कनेक्शन शामिल नहीं है। इस टेक्नोलॉजी में सीधे सैटेलाइट से कनेक्शन किया जाता है। वहींल जियो फाइबर में एक फाइबर सेटअप में राउटर, वायरिंग और दूसरी डिवाइस का सेटअप भी शामिल है। वहीं एयरफाइबर एक फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सिस्टम है, जो ज्यादातर वायरलेस है लेकिन इसमें ग्राहकों की छतों, छतों या उनके घरों के बाहर एक आउटडोर यूनिट भी लगानी पड़ती है।