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Onion Price: टमाटर के बाद अब प्याज भी होगा महंगा, जानें कब और कितनी होगी बढ़ोतरी

Onion Price: क्रिसिल ने एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि आपूर्ति में संभावित कमी के कारण सितंबर की शुरुआत में खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, अक्टूबर में आपूर्ति में सुधार होने से कीमतों में कमी आ जाएगी। कुछ दिनों पहले तक 15 रुपये किलो बिकने वाली प्याज की कीमत अब 25 से 30 रुपये हो गई है

Akhileshअपडेटेड Aug 04, 2023 पर 5:07 PM
Onion Price: टमाटर के बाद अब प्याज भी होगा महंगा, जानें कब और कितनी होगी बढ़ोतरी
Onion Price: रिपोर्ट में कहा गया है कि प्याज की वार्षिक उत्पादन 29 मिलियन मीट्रिक टन होने का अनुमान है

टमाटर (Tomato Price Rise) की आसमान छूती कीमतों के बीच अब प्याज (Onion Price Hike) पर भी महंगाई का रंग चढ़ने लगा है। किसानों को रूलाने के बाद अब प्याज आम लोगों की आंखों से महंगाई के आंसू निकालने को तैयार है। बारिश से फसलों को हुए नुकसान के कारण प्याज के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ दिनों पहले तक 15 रुपये किलो बिकने वाली प्याज की कीमत अब 25 से 30 रुपये हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक आगे इसकी कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। क्रिसिल (Crisil) ने एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि आपूर्ति में संभावित कमी के कारण सितंबर की शुरुआत में खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, अक्टूबर में आपूर्ति में सुधार होने से कीमतों में कमी आ जाएगी।

Crisil ने कहा, "सितंबर के बजाय अगस्त के अंत तक खुले बाजार में रबी स्टॉक में काफी गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे मंदी का मौसम 15-20 दिनों तक बढ़ जाएगा, जिससे बाजार में आपूर्ति में कमी और ऊंची कीमतों का सामना करने की संभावना है।" रिपोर्ट में कहा गया है कि असामान्य मौसम की स्थिति ने पारंपरिक आपूर्ति को बाधित कर दिया है। प्याज की कीमतें फिलहाल 30 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उच्च तापमान के कारण फरवरी में प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र (कुल हिस्सेदारी का 49 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (22 प्रतिशत), और राजस्थान (6 प्रतिशत) में रबी की फसल जल्दी पक गई।

इसके अलावा, मार्च में इन क्षेत्रों में बेमौसम बारिश ने प्याज की गुणवत्ता को प्रभावित किया। मूसलाधार बारिश से इसकी शेल्फ लाइफ छह महीने से घटकर 4-5 महीने रह गई, जिससे भंडारण संबंधी चिंताएं बढ़ गईं और किसानों द्वारा घबराहट में बिक्री शुरू हो गई।

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