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Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana: ओवरड्राफ्ट की सुविधा समेत मिलते हैं कई फायदे, नहीं जानते हैं तो जान लीजिए

Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana: मौजूदा समय में प्रधानमंत्री जन धन खातों में 2.03 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। इस योजना में 50.70 करोड़ लाभार्थी रजिस्टर्ड है। इन पचास करोड़ खातों में से आधे से ज्यादा करीब 56 फीसदी खाते महिलाओं के नाम पर हैं। केंद्र सरकार ने लोगों को सेविंग की ओर बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना लॉन्च की थी

Jitendra Singhअपडेटेड Oct 26, 2023 पर 12:27 PM
Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana: ओवरड्राफ्ट की सुविधा समेत मिलते हैं कई फायदे, नहीं जानते हैं तो जान लीजिए
Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana: जनधन योजना में किसी भी उम्र के व्यक्ति अपना अकाउंट ओपन करवा सकते हैं।

Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana: लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और हर तबके के लोगों को बैंकिंग सेक्‍टर से जोड़ने के मकदस से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन धन योजना (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana-PMJDY) की शुरुआत की थी। इस योजना को साल 2014 में लॉन्च किया गया था। इस योजना के तहत भारतीय नागरिक जीरो बैलेंस पर अपना अकाउंट खुलवा सकते हैं। इस खाते पर आमजन को चेक बुक, पासबुक, दुर्घटना बीमा के अलावा ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के तहत जन धन अकाउंट होल्‍डर अकाउंट में बैलेंस न होने पर भी अपने खाते से 10,000 रुपये तक निकाल सकते हैं।

अब तक इस योजना के तहत 50 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खोले जा चुके हैं। लॉन्चिंग के बाद से ही इस योजना का आम जनता पर काफी अच्छा असर हुआ है। 28 अगस्त 2023 तक PMJDY में कुल 2.03 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इसके अलावा इस योजना में 50 करोड़ से ज्यादा अकाउंट खोले जा चुके हैं।

PMJDY में कितना होना चाहिए मिनिमम बैलेंस

PMJDY में जीरो बैलेंस पर अकाउंट खुलवा सकते हैं। यानी अगर अकाउंट में पैसे नहीं हैं। तब भी अकाउंट एक्टिव रहेगा इससे गरीब तबके के लोगों को बैंकिंग सेक्टर से जुड़ना आसान हो जाता है। मौजूदा समय में इस योजना में 50.70 करोड़ लाभार्थी रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 56 फीसदी बैंक अकाउंट महिलाओं के हैं। प्रधानमंत्री जन धन के कुल खातों में से 67 फीसदी खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के खोले गए हैं। इतना ही नहीं इन खातों पर रुपे कार्ड भी जारी किये जाते हैं जिनकी संख्या 34 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

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