सीएनबीसी-आवाज़ को आज 17 साल पूरे हो गये। आपका चहेता चैनल आज 17वां जन्म दिन मना रहा है जो तब से लेकर आज तक देश में RETAIL EQUITY क्रांति का सूत्रधार बना रहा है। आवाज़ के 17वें जन्मदिन के अवसर एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन और सीईओ केकी मिस्त्री (Keki Mistry HDFC, Vice Chairman & CEO) ने चैनल से विशेष बातचीत की। मिस्त्री ने इस बातचीत में रियल्टी सेक्टर पर अपना नजरिया बताया। इसके आगे हाउसिंग की डिमांड कैसी रहेगी, कोरोना से रियल्टी सेक्टर में क्या बदलाव देखने को मिले हैं। इसके अलावा ब्याज की दरों पर पर भी केकी मिस्त्री ने अपनी राय दी।
कई सालों बाद साल 2021 में हाउसिंग में मजबूत मोमेंटम नजर आया है। इसमें कितना स्ट्रक्चरल और पेंट अप दिख सकता है और क्या ये मोमेंटम 2022 में भी जारी रह सकता है?
इसका जवाब देते हुए केकी मिस्त्री ने कहा कि 2017-20 में हाउसिंग की मांग टियर 2-3 शहरों से आई है। मुंबई के बाहरी इलाकों से घरों की मांग आई है। पिछले 3-4 सालों में लोगों की आय बढ़ी है। हालांकि रियल एस्टेट में कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। देखा जाये तो 2021 में घरों के वही दाम थे तो 2017 में थे। मेरा मानना है कि ओवर सप्लाई के कारण भी प्रॉपर्टी के दाम कम रहे।
इसे पहले ऐसा बढ़िया मोमेंटम पिक-अप 2003 2008 के बीच हुआ था, ये रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट्स का गोल्डन पीरियड था। तो क्या उस समय और अब इस बार के इस मोमेंटम में कोई समानता नजर आती है?
केकी मिस्त्री ने कहा कि ये ध्यान रखना चाहिए रियल एस्टेट में मांग बढ़ती-घटती रहती है। ऐसा देखने को मिलता है कि 2-3 साल सेक्टर में मांग नहीं रहती है लेकिन ऐसा भी होता है जब अगले 3-4 साल मांग में तेजी आ जाएगी। इसलिए हमने देखा कि 2003-08 का दौर भी तेजी का दौर था। लेकिन ये भी देखा गया है कि टियर-2, टियर-3 शहरों में मांग हमेशा बनी रही है। जबकि बड़े शहरों में मांग में कमी देखने को मिली।
इस साल 2022 में दरों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता बनी हुई है। इस बारे आप लोगों का क्या आकलन है इस साल कितनी होंगी दरें और क्या इससे डिमांड वापस घटने या इस पर कुछ असर हो सकता है?
उन्होंने आगे कहा कि देश में हाउसिंग लोन की दरें काफी कम हैं। आंकड़ों के मुताबिक अभी तक कभी भी लोन की दरें 7% से कम नहीं रही हैं। इसलिए ब्याज दरों में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है। वहीं दरें बढ़ने का मांग पर असर नहीं होगा क्योंकि ग्राहक को होम लोन पर कई तरह की टैक्स छूट मिलती है इसलिए दरें बढ़ने का भी ग्राहक पर ज्यादा असर नहीं होता है।
ये COVID की तीसरी लहर क्या क्रेडिट ऑफटेक को धीमा कर सकती है, क्या हम डिफॉल्ट्स को बढ़ते हुए देख सकते हैं? या इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी है?
केकी मिस्त्री ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर कम असर संभव है। इस बार मांग पर भी कोरोना का कोई असर नहीं होगा। यहां तक कि देश में इस बार लॉकडाउन की भी आशंका भी कम है। इसलिए यदि लॉकडाउन नहीं लगेगा तो लोगों की आय बनी रहेगी।