हर दिन इस्तेमाल होने वाली डिब्बाबंद चीजों पर शहरों के मुकाबले अब गांवों में खर्च अधिक हो रहा है। यह खुलासा कंज्यूमर इंटेलिजेंस फर्म नील्सनआईक्यू की एक रिपोर्ट से हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2024 तिमाही में वैल्यू के आधार पर भारत में एफएमसीजी सेक्टर सालाना आधार पर 6.6 फीसदी बढ़ा। वॉल्यूम के आधार पर यह आंकड़ा 6.5 फीसदी रही जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 3.1 फीसदी था। हालांकि प्राइस ग्रोथ लगभग फ्लैट 0.1 फीसदी ही रही। खास बात ये है कि पांच तिमाहियों में पहली बार गांवों की खपत ने शहरी मांग को पीछे छोड़ दिया है। शहरों में पैकेज्ड कंज्यूमर गुड्स की मांग तिमाही आधार पर 5.7 फीसदी गिर गई लेकिन गांवों में यह 7.6 फीसदी की दर से बढ़ी।
फूड की बजाय नॉन-फूड सेगमेंट की रफ्तार डबल
रिपोर्ट के मुताबिक फूड और नॉन-फूड, दोनों क्षेत्रों ने खपत बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। हालांकि फूड की तुलना में नॉन-फूड कैटेगरी में ग्रोथ की रफ्तार लगभग डबल रही। नॉन-फूड सेक्टर की ग्रोथ 11 फीसदी रही जबकि वॉल्यूम के आधार पर फूड सेक्टर की रफ्तार 4.8 फीसदी ही रही। नील्सनआईक्यू के प्रमुख (कस्टमर सक्सेस, इंडिया) रूजवेल्ट डी सूजा के मुताबिक होम और पर्सनल केयर कैटेगरीज में वॉल्यूम बड़े पैक साइज की पॉपुलरिटी बढ़ने के चलते उछली। हालांकि फूड कैटेगरीज में यूनिट खरीदारी अधिक रही।
छोटी और बड़ी कंपनियों का दिखा फर्क
रिपोर्ट के मुताबिक एफएमसीजी इंडस्ट्री में छोटी कंपनियों की तुलना में बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर है। हालांकि पिछली दो तिमाहियों में बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी कंपनियों की नॉन-फूड कैटेगरी में वॉल्यूम ग्रोथ रेट अधिक रही। इसकी वजह ये हो सकती है कि छोटी कंपनियों को फूड सेक्टर में कीमतें स्थिर रखने में दिक्कतें आती हैं लेकिन नॉन-फूड कैटेगरीज में कीमतों में अहम बढ़ोतरी के साथ वॉल्यूम ग्रोथ भी बढ़ी।