service charges on Restaurant Bill : डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स (DOCA) ने कंज्यूमर्स से जबरन सर्विस चार्जेस वसूले जाने के खिलाफ 23 मई को रेस्टोरेंट्स को आगाह किया है। रेस्टोरेंट्स और ईटरीज यानी भोजनालयों को याद दिलाया गया है कि यह कंज्यूमर्स के विवेक पर निर्भर करता है कि वे सर्विस चार्जेस देना चाहते हैं या नहीं। यह पूरी तरह स्वैच्छिक है।
डीओसीए ने कहा, यह बात पता चली है कि रेस्टोरेंट्स और भोजनालय अभी भी कंज्यूमर्स से सर्विसेज चार्जेस वसूल रहे हैं, जबकि इसका कलेक्शन स्वैच्छिक है और कंज्यूमर्स के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है और निश्चित रूप से कानून के तहत बाध्यकारी नहीं है।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन 2 जून को बुलाएगी मीटिंग
इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा के लिए नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन (एनआरए) को 2 जून को बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में कंज्यूमर्स द्वारा की गई शिकायतों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, रेस्टोरेंट्स के सर्विस चार्जेस को अनिवार्य बनाने, रेस्टोरेंट्स के बिल में अन्य शुल्क या चार्ज के साथ सर्विस चार्ज को जोड़ने, रेस्टोरेंट के कंज्यूमर को सर्विस चार्ज वैकल्पिक और स्वैच्छिक होने के बारे में नहीं बताने, सर्विस चार्जेस देने से इनकार करने पर रेस्टोरेंट्स द्वारा कंज्यूमर्स को शर्मिंदा करने आदि पर विचार किया जाएगा।
2017 में सर्विस चार्ज पर जारी की थी गाइडलाइन
इससे पहले अप्रैल, 2017 में कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री ने बिल में “सर्विस चार्ज” जोड़ने पर एक गाइडलाइन जारी की थी। मिनिस्ट्री ने कहा कि इस कॉलम को खाली छोड़ना चाहिए और इसके भुगतान का मामला कस्टमर की इच्छा पर छोड़ना चाहिए।
तत्कालीन खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने सर्विस चार्ज पर केंद्र की गाइडलाइंस का ऐलान करते हुए कहा था होटल और रेस्टोरेंट बिल पर सर्विस चार्ज “पूरी तरह स्वैच्छिक” है और जरूरी नहीं है।
पासवान ने कहा कि होटलों और रेस्टोरेंट्स को यह तय नहीं करना चाहिए कि कस्टमर को कितना सर्विस चार्ज देना है। यह कस्टमर के विवेकाधिकार पर छोड़ना चाहिए।