Sugar Price: त्योहारों से पहले चीनी की मिठास हुई महंगी और 'कड़वी', सरकार ने सख्त किए स्टॉक लिमिट के नियम
Price of sugar: त्योहारी सीजन से पहले चीनी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने स्टॉक रखने की सीमा को और कड़ा कर दिया है। नए आदेश के तहत, महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को अब 15 दिन से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी
Price of sugar: चीनी के दाम बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं
Price of sugar: देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की कीमतों में लगातार तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के स्टॉक रखने की सीमा को और सख्त कर दिया है। सरकार के नए आदेश के मुताबिक, हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार या इस्तेमाल करने वाले डीलरों को अब अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर ही चीनी स्टॉक रखने की अनुमति होगी। यह नया नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।
10 दिन में प्रति क्विंटल 200 रुपये तक की भारी तेजी
दरअसल, त्योहारी सीजन से पहले रसोई का स्वाद बढ़ाने वाली चीनी की कीमतों में आए अचानक उछाल ने चाय की मिठास छीन ली है। इस वक्त चीनी के दाम बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। 'दैनिक जागरण' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के मुजफ्फरपुर के बाजारों में बीते 10 दिनों के भीतर चीनी की कीमतों में प्रति क्विंटल 200 रुपये तक की भारी तेजी दर्ज की गई है। बुधवार को थोक मंडी में चीनी 64 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। जबकि खुदरा दुकानों पर ग्राहकों को 65 से 66 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदनी पड़ रही है।
पहले 30 दिन की थी स्टॉक लिमिट
मोदी सरकार ने पिछले महीने ही डीलरों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा 30 दिन तय की थी। लेकिन इसके बावजूद कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही। अब सरकार ने स्टॉक लिमिट को आधा करते हुए इसे 15 दिन कर दिया है। सरकार का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना और कारोबारियों द्वारा बड़ी मात्रा में स्टॉक जमा करने की संभावना को कम करना है।
एक महीने में करीब 10 फीसदी बढ़े दाम
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक महीने में चीनी की खुदरा कीमतों में करीब 10 फीसदी की तेजी आई है। कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। उद्योग संगठन के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को देश में चीनी का औसत एक्स-मिल भाव 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। एक साल पहले यही भाव करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल था।
इस वजह से खुदरा बाजार में भी चीनी महंगी हुई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो रही। जबकि एक साल पहले यह 46.34 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर खुदरा कीमत में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
त्योहारों के कारण बढ़ने वाली है चीनी की मांग
भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। आमतौर पर अगस्त से नवंबर के बीच देश में चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। घरों में मिठाइयों और अन्य पकवानों की मांग बढ़ने के साथ-साथ मिठाई, बिस्कुट एवं कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियां भी बड़ी मात्रा में चीनी खरीदती हैं। यही वजह है कि त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों को लेकर सरकार अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
2026-27 के चीनी सीजन में सप्लाई को लेकर चिंता
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब 2026-27 का चीनी सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। नए सीजन की शुरुआत में देश के पास कितनी चीनी उपलब्ध होगी, इसे लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं। उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक, शुरुआती स्टॉक करीब 40-42 लाख टन हो सकता है। वहीं, कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान इससे भी कम करीब 32-35 लाख टन का है। चिंता की बात यह है कि दोनों अनुमान देश की अनुमानित घरेलू जरूरत से कम हैं। घरेलू खपत करीब 50 लाख टन रहने का अनुमान है।
मौजूदा सीजन में भी घटेगा स्टॉक
2025-26 के मौजूदा चीनी सीजन में कुल उपलब्धता करीब 320 लाख टन रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले घरेलू खपत करीब 285 लाख टन बताई गई है। करीब 7 लाख टन चीनी के निर्यात के बाद सीजन के अंत में देश में बचा हुआ स्टॉक करीब 35 लाख टन तक रह सकता है। इस स्थिति में सरकार के सामने घरेलू मांग पूरी करने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की चुनौती बढ़ गई है।
कम बारिश और सूखे मौसम ने बढ़ाई चिंता
चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता सिर्फ बढ़ती मांग की वजह से नहीं है। कुछ इलाकों में असमान बारिश और शुष्क मौसम का असर गन्ने की फसल पर भी पड़ा है। अगर गन्ने की पैदावार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, तो आने वाले सीजन में चीनी उत्पादन और उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ती मांग कीमतों पर और दबाव डाल सकती है।
महंगाई सरकार के सामने बड़ी चुनौती
चीनी भारत में बेहद संवेदनशील खाद्य वस्तु है। इसकी कीमतों में तेजी का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान इसकी मांग और बढ़ जाती है, इसलिए सरकार कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। स्टॉक लिमिट को 30 दिन से घटाकर 15 दिन करने का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब सरकार की नजर बाजार में चीनी की उपलब्धता, कीमतों और नए सीजन की फसल पर रहेगी।