शहर में गाय-भैंस पालने के लिए लाइसेंस की जरूरत, गाय के लिए 500 और भैंस के लिए 1000 रुपये सालाना फीस

भारत कृषि प्रधान देश है। भारत की करीब 58 फीसदी आबादी कृषि और इससे जुड़े हुए उद्योग पर निर्भर है। ज्यादातर लोग इस उद्योग को गांवों में करते हैं। लेकिन पशुपालन का बिजनेस शहरों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने गाय-भैंस पालने के लिए लाइसेंस जरूरी कर दिया है। फिलहाल अभी इस बारे में नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है

अपडेटेड Aug 12, 2024 पर 3:04 PM
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में दो या उससे अधिक गाय-भैंस रखने वाले सभी लोगों को नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा।

अगर आप गाय-भैंस पालते हैं तो अब लाइसेंस लेना होगा। पहले शहरों में गाय भैंस पालने पर पाबंदी नहीं थी। लेकिन 2017 में सरकार ने इसे लेकर कुछ नियम बनाएं हैं। जिसके बाद सरकार इनमें बदलाव करती आ रही हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में गाय-भैंस पालने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी हो जाएगा। इस बारे में नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए दो या उससे अधिक गाय-भैंस रखने वाले सभी लोगों को नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा। गाय के लिए 500 रुपये और भैंस के लिए 1000 रुपये लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। हर साल इसका रिन्यू कराना होगा।

वहीं जिनके पास दो या दो से कम पशु हैं, अपनी भूमि पर पालन पोषण कर रहे हैं तो उनको डेयरी की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। जल्द ही इस बारे में नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद यह नियम सख्ती से लागू कर दिया जाएगा।

लाइसेंस लेने के लिए इन बातों का रखें ध्यान


लाइसेंस के लिए जरूरी है कि पशुपालक पशुओं को अच्छी जगह में रखना होगा। जांच पड़ताल के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। हर एक पशु के लिए आठ वर्ग मीटर का हवादार जगह, ठंड, धूप और बारिश से बचाव के साथ खाने-पीने के लिए उचित इंतजाम जरूरी किए गए हैं। गोबर समेत अन्य कचरा, पशुशाला से कम से कम सात मीटर दूर रखना होगी। डेयरी की फर्श भी पक्की होनी चाहिए। पशु पालन करने वाले को अप्रैल महीने में लाइसेंस लेना होगा। ऐसा नहीं करने पर जुर्माने का प्रवाधन किया गया है। साथ ही लाइसेंस लेने पर विलंब शुल्क लगेगा। नियमों की अनदेखी पर पहली बार अवैध डेयरी संचालक पर 1000 रुपये और दूसरी बार 2000 रुपये जुर्माना देना होगा। अवैध डेयरी पर अधिकतम 50,000 रुपये जुर्माना लगाया जा सकेगा।

लाइसेंस के लिए मिलेगा टोकन

लाइसेंस लेने पर पशुपालक को निगम की ओर से टोकन मिलेगा। जिसे पशु की गर्दन में ऐसे बांधना होगा ताकि वह साफ तौर पर दिखाई दे। टोकन से गाय और भैंस के मालिक की पहचान हो सकेगी। पशुपालक को सार्वजनिक स्थलों मसलन, गली, सड़क, पार्क के आसपास पशुओं को खुला नहीं छोड़ना होगा।

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