Crypto vs Gold: ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान निवेश के ट्रेंड में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आमतौर पर संकट के समय सोना-चांदी सबसे सेफ निवेश माने जाते हैं। ऐसे समय में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी रहती है, लेकिन इस बार ऐसा देखने को नहीं मिला। इस बार क्रिप्टोकरेंसी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। Binance की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक इस पीरियड में Bitcoin और Ethereum ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया।
क्रिप्टो और सोने-चांदी ने कैसा किया परफॉर्म
रिपोर्ट के अनुसार संकट की शुरुआत से करीब 32 दिनों के अंदर Bitcoin ने 1% से ज्यादा और Ethereum ने करीब 6% का रिटर्न दिया। वहीं, सोने में करीब 13% और चांदी में 22% तक की गिरावट देखी गई। इस दौरान शेयर बाजार भी दबाव में रहा। S&P 500 इंडेक्स करीब 8% गिरा, जबकि बड़ी टेक कंपनियों का समूह Magnificent Seven करीब 10% तक टूट गया। सेमीकंडक्टर और उभरते बाजारों से जुड़े ETF में भी 12-13% तक की गिरावट आई।
क्रिप्टो को क्यों मिला सपोर्ट?
एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार क्रिप्टो बाजार को संस्थागत निवेश (institutional investment) से बड़ा सहारा मिला। Bitcoin ETF में करीब 1.7 अरब डॉलर का निवेश आया, जिससे बाजार को मजबूती मिली। कंपनियों ने भी अपने फंड का हिस्सा क्रिप्टो में लगाना जारी रखा। Ethereum में मार्च महीने में 6.27% की बढ़त रही, जबकि Bitcoin में 1.5% की तेजी आई। कुल मिलाकर, मार्च 2026 में क्रिप्टो मार्केट का मार्केट कैप करीब 1.8% बढ़ा।
सोना-चांदी क्यों कमजोर पड़े?
पिछले साल 2025 में सोना-चांदी ने शानदार रैली की थी। जनवरी 2026 में सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे लेकिन ईरान से जुड़े तनाव और बाजार की बदलते ट्रेंड के बाद इनमें गिरावट आई। एक्सपर्ट के मुताबिक जब भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद बनती है, तो निवेशक सेफ ऑप्शन जैसे सोने से निकलकर जोखिम वाले एसेट जैसे शेयर और क्रिप्टो में निवेश करते हैं।
एक्सपर्ट का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। सोना सीमित दायरे में रह सकता है, जबकि क्रिप्टो में निवेशकों की इंटरेस्ट बना रह सकता है। इस बार का ट्रेंड यह दिखाता है कि इन्वेस्टमेंट की दुनिया बदल रही है। जहां पहले संकट के समय सोना सबसे सेफ माना जाता था, वहीं अब क्रिप्टो भी एक मजबूत ऑप्शन बनकर उभर रहा है।
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