बढ़ते साइबर जोखिमों को देखते हुए साइबर बीमा अब वैकल्पिक रिस्क ट्रांसफर टूल नहीं रह गया है। यह एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है। इतना ही नहीं इसका रिन्यूअल भी हो रहा है। पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेस की एक स्टडी के मुताबिक, साइबर बीमा क्लाइंट्स में से लगभग 100% अपनी पॉलिसी का रिन्यूअल करा रहे हैं। बिजनेस अब साइबर जोखिमों की दोहराव वाली और बदलती प्रकृति को पहचान रहे हैं।
साइबर इंश्योरेंस को अपनाने में 10 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियां सबसे आगे हैं। यह दर्शाता है कि अधिक रेवेन्यू वाले कारोबार रिस्क मैनेजमेंट को लेकर अधिक सक्रिय हैं। सेक्टरवाइज बात करें तो स्टडी के मुताबिक, साइबर इंश्योरेंस को अपनाया जाना मुख्य रूप से 5 इंडस्ट्रीज में केंद्रित है।
साइबर बीमा लेने वाली कंपनियों में से 35-40 प्रतिशत BFSI (Banking, Financial Services and Insurance) सेक्टर से हैं। वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा उल्लंघन और रेगुलेटरी जांच के उच्च जोखिम को देखते हुए फाइनेंशियल सेक्टर साइबर बीमा का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसके बाद टेक्नोलॉजी और आईटी सेक्टर है, जिसकी साइबर बीमा लेने वालों हिस्सेदारी 30% है। आईटी फर्म बड़ी मात्रा में ग्राहक और एंटरप्राइज डेटा को मैनेज करती हैं। इसके चलते वे साइबर हमलों के लिए प्रमुख टारगेट बन जाती हैं।
स्टार्टटप, हेल्थकेयर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कितनी हिस्सेदारी
साइबर बीमा लेने वालों में स्टार्टअप्स की हिस्सेदारी 25% है। हेल्थकेयर सेक्टर की हिस्सेदारी 5% है। मरीजों का सेंसिटिव डेटा और रैनसमवेयर खतरे इस बीमा को अपनाने को बढ़ावा दे रहे हैं। लॉजिस्टिक्स सेक्टर की हिस्सेदारी भी 5% है।
साइबर बीमा लेने वालों में फर्स्ट टाइम बायर 30-35%
साइबर बीमा खरीदने वाले कारोबारों में से 30-35% ऐसे हैं, जो पहली बार यह बीमा ले रहे हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि साइबर बीमा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। यह ट्रेंड रिएक्टिव से प्रोएक्टिव साइबर रिस्क मैनेजमेंट की ओर शिफ्ट की ओर इशारा करता है। लगभग एक तिहाई खरीदार नए ग्राहक होने के कारण, बाजार में पैठ स्पष्ट रूप से बढ़ रही है। जो कंपनियां पहले साइबर जोखिमों को कम आंकती थीं, अब साइबर हमलों के वित्तीय असर को पहचान रही हैं।