Daughter Property Rights: पिता की प्रॉपर्टी में बेटी के अपना हिस्सा क्लेम करने के लिए क्या किसी तरह की डेडलाइन तय है?

Daughter Property Rights: अगर निधन से पहले पिता ने कोई वसीयत नहीं बनाई थी तो निधन के तुरंत बाद उनकी पूरी संपत्ति का बंटवारा हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के शिड्यूल के तहत कानूनी उत्तराधिकारियों में होता है। अगर पिता ने वसीयत बनाई है और बेटी को संपत्ति में हिस्सा दिया है तो वह वसीयत के मुताबिक इसका दावा कर सकती है

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 12:55 PM
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अगर वसीयत के बगैर पिता का निधन हो जाता है तो बेटी पिता की संपत्ति में अपने हिस्सा पर दावा के लिए याचिका दाखिल कर सकती है।

Daughter Property Rights: पिता की प्रॉपर्टी में बेटी अपना हिस्सा क्लेम कर सकती है। अगर वसीयत बनाए बगैर पिता का निधन हो जाता है तो बेटी हिंदू सक्सेशन एक्ट के तहत अपना हिस्सा क्लेम कर सकती है। गाजियाबाद की नेहा जैन ने इस बारे में एक सवाल पूछा है। उनका सवाल है कि अगर वसीयत बनाए बगैर पिता का निधन हो जाता है तो क्या बेटी के अपना हिस्सा क्लेम करने के लिए किसी तरह की डेडलाइन तय है? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन से पूछा।

वसीयत होने पर उसके हिसाब से संपत्ति का बंटवारा

जैन ने कहा कि इस बारे में नेहा को किसी वकील की सलाह लेनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि वकील नेहा की पूरी स्थिति जानने के बाद उसके आधार पर अपनी सलाह देगा। उन्होंने कहा कि अगर निधन से पहले हिंदू पिता ने कोई वसीयत बनाई है तो वसीयत के मुताबिक संपत्ति का बंटवारा कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच होता है।


वसीयत नहीं होने पर हिंदू सक्सेशन एक्ट लागू होता है

उन्होंने कहा कि अगर निधन से पहले पिता ने कोई वसीयत नहीं बनाई थी तो निधन के तुरंत बाद उनकी पूरी संपत्ति का बंटवारा हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के शिड्यूल के तहत कानूनी उत्तराधिकारियों में होता है। अगर पिता ने वसीयत बनाई है और बेटी को संपत्ति में हिस्सा दिया है तो वह वसीयत के मुताबिक इसका दावा कर सकती है। अगर वसीयत के बगैर पिता का निधन हो जाता है तो बेटी पिता की संपत्ति में अपने हिस्सा पर दावा के लिए याचिका दाखिल कर सकती है।

हिंदू सक्सेशन एक्ट में याचिका दाखिल करने की समयसीमा नहीं

जैन ने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 के तहत इस तरह का याचिका दाखिल करने के लिए किसी तरह की समयसीमा तय नहीं की गई है। लेकिन, लिमिटेशन एक्ट, 1963 में 12 साल का पीरियड निर्धारित है। इसका मतलब है कि जिस तारीख से दावा की जरूरत पड़ती है उससे 12 साल के अंदर संपत्ति में अपने हिस्से का दावा किया जाना चाहिए।

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अधिकार खारिज होने की तारीख से शुरू होता है 12 साल का पीरियड 

लोग यह समझते हैं कि लिमिटेशन का पीरियड व्यक्ति के निधन की तारीख से शुरू होता है, जो सही नहीं है। लिमिटेशन का पीरियड उस तारीख से शुरू होता है, जिस दिन से याचिका दाखिल करने का अधिकार मिलता है। यह आम तौर पर वह तारीख होती है, जब संपति में हिस्सा के अधिकार को खारिज किया जाता या बेटी को संपत्ति के बंटवारे से बाहर रखा जाता है या कोई दूसरा उत्तराधिकारी उसके (बेटी) के हक को मानने से इनकार कर देता है।

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