आज के डिजिटल समय में बिना क्रेडिट कार्ड के भी बड़ी शॉपिंग संभव है, डेबिट कार्ड की EMI सुविधा के लिए सारे ग्राहक धन्यवाद कहते हैं। HDFC बैंक, SBI, Axis और ICICI जैसी बड़ी बैंकें अब डेबिट कार्ड पर EMI का ऑप्शन दे रही हैं। मोबाइल, टीवी, होम अप्लायंसेज सबकुछ आप किस्तों में घर ला सकते हैं। बैंक आपकी सेविंग्स और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखकर एक लिमिट तय करते हैं, जिससे आपकी हर महीने की तय राशि डायरेक्ट आपके खाते से कट जाती है।
ज्यादातर केस में डेबिट कार्ड EMI क्रेडिट स्कोर यानी सिबिल स्कोर को डायरेक्ट नहीं छूती क्योंकि इसे ट्रेडिशनल लोन की तरह क्रेडिट लाइन नहीं माना जाता। लेकिन अगर कोई बैंक इन किस्तों को शॉर्ट-टर्म कंज्यूमर लोन की तरह देखता है और रिपोर्ट करता है, तो यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में रिकॉर्ड बन सकती है।
अगर आपकी EMI बैंक द्वारा क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट होती है, और आप अपनी सभी किस्तें समय पर चुकाते हैं, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर के लिए पॉजिटिव साबित हो सकता है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनका कोई क्रेडिट कार्ड या पुराना लोन हिस्ट्री नहीं है, यह एक नया क्रेडिट प्रोफाइल बनाने का मौका है। सही समय पर पेमेंट आपके स्कोर को सुधारने में मदद कर सकती है।
अगर EMI की राशि तय समय पर नहीं चुकती, या खाते में बैलेंस पर्याप्त न हो, तो बैंक पेनल्टी तो लगाएगा ही, साथ ही अगर ये EMI डिटेल्स क्रेडिट ब्यूरो को पहुंचती हैं, तो आपका CIBIL स्कोर गिर सकता है। इससे भविष्य में लोन लेने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। रिपोर्ट न होने की हालत में भी अगर बार-बार पेमेंट फेल हुई तो बैंक आगे आपको कोई लोन देने से मना कर सकता है।
- EMI को एक असली लोन की तरह ही समझें और हर महीने अकाउंट में EMI से थोड़ी ज्यादा राशि रखें।
- अपनी बैंक की EMI रिपोर्टिंग पॉलिसी जरूर जानें कि क्या वह जानकारी CIBIL को भेजती है या नहीं।
- समय पर सभी किस्तें चुकाना जरूरी है, इससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगी।
डेबिट कार्ड EMI एक आसान और पॉपुलर सुविधा है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल और टाइम पर पेमेंट करना बेहद जरूरी है। EMI के जरिये क्रेडिट स्कोर बनाना या सुधारना संभव है, लेकिन लापरवाही से क्रेडिट प्रोफाइल नुकसान में भी जा सकती है।