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Finance Act 2023 में बदलाव के बाद क्या डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश फायदेमंद है?

म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों के टैक्स के नियम बदल गए हैं। फाइनेंस बिल 2023 के जरिए यह बदलाव किया गया है। हालांकि. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को जो बजट पेश किया था, उसमें इस बदलाव का जिक्र नहीं था। इसे फाइनेंस बिल 2023 में बाद में शामिल किया गया

Abhishek Anejaअपडेटेड Apr 24, 2023 पर 2:42 PM
Finance Act 2023 में बदलाव के बाद क्या डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश फायदेमंद है?
टैक्स नियमों में इस बदलाव से पहले डेट म्यूचुअल फंड्स में तीन साल से ज्यादा पीरियड के निवेश पर इनवेस्टर्स की काफी टैक्स सेविंग्स हो जाती थी। हालांकि, 31 मार्च, 2023 तक किए गए निवेश पर पहले के नियम लागू होंगे।

इनवेस्टमेंट के फैसले लेने से पहले इनवेस्टर्स अक्सर टैक्स के असर का ध्यान रखते हैं। 1 अप्रैल, 2023 से पहले कई इनवेस्टर्स खासकर अमीर निवेशक (HNI कैटेगरी के) म्यूचुअल फंड्स की डेट स्कीमों में इनवेस्ट करने में दिलचस्पी दिखाते थे। इसकी वजह यह थी कि ये टैक्स से लिहाज से फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले अट्रैक्टिव दिखती थी। इंडिया में फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट्स में निवेश से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेंस या दूसरे स्रोत (इंटरेस्ट इनकम या डिविडेंड) के तहत टैक्स लगता है। यह इंस्ट्रूमेंट के नेचर पर निर्भर करता है।

कैपिटल गेंस पर टैक्स

इंटरेस्ट इनकम और डिविडेंड पर टैक्स का रेट इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से तय होता है। कैपिटल गेंस पर टैक्स शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म के आधार पर लगता है। इसका निर्धारण फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के नेचर और इनवेस्टमेंट के होल्डिंग पीरियड से तय होता है। मार्च 2023 के अंतिम हफ्ते में सरकार के एक फैसले से म्यूचुअल फंड्स के डेट फंडों के इनवेस्टर्स को झटका लगा। सरकार ने 1 अप्रैल, 2023 के बाद इन फंडों में तीन साल से ज्यादा के निवेश पर इंडेक्सेशन का बेनेफिट हटा दिया। इस फैसले ने इनवेस्टर्स को हैरान कर दिया, क्योंकि यह प्रस्ताव 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में शामिल नहीं था। इस अंतिम समय में फाइनेंश बिल 2023 में शामिल किया गया, जिसे बाद में संसद के दोनों सदनों ने पारित कर दिया।

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