1350 किमी लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की वजह से इन शहरों में रियल स्टेट का बाजार चमक रहा, इन्वेस्टमेंट में तगड़ा इजाफा

Delhi Mumbai Expressway: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे बसे टियर-2 शहरों खासकर जयपुर और इंदौर में प्रॉपर्टी की डिमांड और कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। डेवलपर्स और रियल एस्टेट सलाहकारों के अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी ने आवासीय, कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश के नए दरवाजे खोल दिए हैं

अपडेटेड May 11, 2026 पर 6:48 PM
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एक्सप्रेसवे के नेटवर्क से जुड़ने के बाद जयपुर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है

Delhi-Mumbai Expressway: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे सिर्फ दो महानगरों के बीच का सफर कम नहीं कर रहा, बल्कि भारत अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित हो रहा है। जयपुर से लेकर इंदौर तक, इस महा-एक्सप्रेसवे के किनारे बसे टियर-2 शहरों की किस्मत चमक उठी है। ये शहर अब लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल हब के रूप में नई पहचान बना रहे हैं। जहां पहले सिर्फ खेत दिखते थे, वहां अब आलीशान रिहाइशी सोसायटियां और बड़े कमर्शियल हब खड़े हो रहे हैं, जिससे प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।

जयपुर बना ऑफिस और रेजिडेंशियल का नया हॉटस्पॉट

एक्सप्रेसवे के नेटवर्क से जुड़ने के बाद जयपुर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है। पिछले एक साल में जयपुर के प्रमुख रेजिडेंशियल और प्लॉटेड क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमतों में 12-18% की वृद्धि दर्ज की गई है। टियर-1 शहरों जैसे- दिल्ली-NCR की तुलना में जयपुर में ऑफिस रेंटल करीब 54% कम हैं। यही वजह है कि बड़ी आईटी कंपनियां और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब जयपुर का रुख कर रहे हैं।जयपुर में ऑफिस स्पेस 2025 के 7.8 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2030 तक 13 मिलियन वर्ग फुट होने का अनुमान है।


इंदौर के बुनियादी ढांचे ने बदली तस्वीर

मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा शहर इंदौर भी बुनियादी ढांचे में सुधार और एक्सप्रेसवे की वजह से चमक रहा है। इंदौर में आवासीय संपत्तियों के दाम पिछले साल 10-15% तक बढ़े हैं। इंदौर में नए आईटी और एंटरप्राइज प्रोजेक्ट्स के लिए रेंटल ₹150-200 प्रति वर्ग फुट के बीच पहुंच रहे हैं, जो शहर की बढ़ती कमर्शियल वैल्यू को दर्शाता है।

इन 7 शहरों की किस्मत बदलेगा एक्सप्रेसवे

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरता है। इसका सीधा फायदा इन सात शहरों जयपुर, कोटा, उदयपुर, इंदौर, अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत को मिल रहा है।

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पारंपरिक मेट्रो शहरों से बाहर एक नया आर्थिक गलियारा बना रहा है। अगर आप लंबी अवधि के निवेश की सोच रहे हैं, तो इन एक्सप्रेसवे शहरों के माइक्रो-मार्केट सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

क्यों बढ़ रही है निवेश की होड़?

डेवलपर्स का मानना है कि एक्सप्रेसवे के कारण ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम हुई है और लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है।

महिंद्रा वर्ल्ड सिटी: जयपुर स्थित 3,000 एकड़ में फैली महिंद्रा वर्ल्ड सिटी में मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग के लिए लीजिंग डिमांड और रेट्स दोनों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है।

संस्थागत निवेश: एक्सप्रेसवे के किनारे किराये की ऊंची दरों (Rental Yields) और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए अब NRIs और बड़े संस्थागत निवेशक इन टियर-2 शहरों में पैसा लगा रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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