सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए अच्छी खबर है। अब इनकम टैक्स रिटर्म फाइल करना उनके लिए काफी आसान हो जाएगा। एंप्लॉयर्स अपने एंप्लॉयीज को डिजिटल फॉर्म 16 इश्यू करेंगे। यह ट्रेडिशनल फॉर्म 16 का डिजिटल वर्जन होगा। अगर आप सरकारी या प्राइवेट नौकरी करते हैं तो आपको रिटर्न फाइल करने के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट्स के पास जाने की जरूरत नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
टैक्स फाइलिंग प्रोसेस अब काफी आसान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने की दिशा में Digital Form 16 एक बड़ा कदम है। सरकार की कोशिश टैक्स कंप्लायंस बढ़ाने की है। सरकार का मानना है कि अगर टैक्स फाइलिंग प्रोसेस को आसान बनाया जाता है तो इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। सैलरीड टैक्सपेयर्स वित्त वर्ष 2024-25 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए डिजिटल फॉर्म 16 का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सीधे TRACES से जेनरेट होता है फॉर्म 16
डिजिटल फॉर्म 16 सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पोर्टल TRACES से जेनरेट होता है। इसलिए इसमें गलत जानकारी होने की संभावना नहीं रहती है। इसमें टैक्सपेयर्स की सैलरी इनकम, टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) और टैक्स डिडक्शंस की जानकारी होती है। यह इस बात का सर्टिफिकेट है कि वित्त वर्ष के दौरान एंप्लॉयी को कुल कितनी इनकम हुई है और उसका कितना टीडीएस काटा गया है। एंप्लॉयर्स वित्त वर्ष में एंप्लॉयीज की सैलरी इनकम के हिसाब से टैक्स काटते हैं।
15 जून फॉर्म 16 इश्यू करने की अंतिम तारीख
एंप्लॉयीज आम तौर पर मई के अंत तक फॉर्म 16 एंप्लॉयीज को इश्यू कर देते हैं। हालांकि, इसकी डेडलाइन 15 जून है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज के लिए 15 जून तक फॉर्म 16 इश्यू कर देना अनिवार्य है। फॉर्म 16 मिलने के बाद ही एंप्लॉयीज रिटर्न फाइल करते हैं। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई होती है। इस तरह अगर एंप्लॉयर्स अगर 15 जून तक भी फॉर्म 16 जारी करते हैं तो एंप्लॉयीज के पास रिटर्न फाइलिंग के लिए पर्याप्त समय होता है।
डिजिटल फॉर्म 16 इस्तेमाल करने का प्रोसेस
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल फॉर्म 16 से रिटर्न फाइल करने में टैक्सपेयर्स को काफी आसानी होगी। पहले उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाना होगा। फिर अपने आईडी और पासवर्ड की मदद से लॉग-इन करना होगा। अपने लिए सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना होगा। फिर नई और पुरानी रीजीम में से किसी एक को सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद डिजिटल फॉर्म 16 अपलोड करना होगा। इसके बाद फॉर्म में कई जरूरी जानकारियां अपने आप आ जाएंगी। टैक्सपेयर्स को टैक्स का कैलकुलेशन भी नहीं करना होगा। एक बार सभी जानकारियों को चेक करने के बाद उसे फॉर्म सब्मिट कर देना होगा।
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डिजिटल फॉर्म 16 के इस्तेमाल के फायदें
चूंकि डिजिटल फॉर्म 16 में किसी डेटा के गलत होने की संभावना नहीं है, जिससे इसके आधार पर फाइल किए गए रिटर्न की प्रोसेसिंग भी जल्द हो जाएगी। इतना ही नहीं, रिफंड का प्रोसेस भी जल्द पूरा होगा। इससे रिफंड का पैसा टैक्सपेयर्स के बैंक अकाउंट में जल्द आ जाएगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल फॉर्म 16 से सैलरीड टैक्सपेयर्स के बीच कंप्लायंस बढ़ेगा। पिछले साल 7 करोड़ से ज्यादा लोगों ने रिटर्न फाइल किया था। इस बार यह संख्या इससे ज्यादा रहने की उम्मीद है।