Get App

Direct Vs Regular Mutual Funds: एक ही स्कीम में ₹13 लाख का फर्क! समझिए कहां पैसा लगाना है आपके लिए फायदेमंद

Regular vs Direct Mutual Fund Difference: क्या आप जानते हैं कि एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम में सिर्फ 'Direct' की जगह 'Regular' चुनने पर आपको 13 लाख रुपए तक का भारी नुकसान हो सकता है। दोनों प्लान्स में फंड मैनेजर से लेकर शेयर्स तक सब एक होते हैं, फिर भी रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर क्यों आता है?

Abhishek Guptaअपडेटेड Aug 26, 2026 पर 9:57 AM
Direct Vs Regular Mutual Funds: एक ही स्कीम में ₹13 लाख का फर्क! समझिए कहां पैसा लगाना है आपके लिए फायदेमंद
इन दोनों प्लान्स में फंड मैनेजर से लेकर शेयर्स तक सब एक होते हैं

Direct Vs Regular Mutual Funds: अगर आप म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करते हैं या एकमुश्त पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, तो आपने 'Direct Plan' और 'Regular Plan' का विकल्प जरूर देखा होगा। पहली नजर में दोनों एक ही स्कीम का हिस्सा लगते हैं। दोनों का फंड मैनेजर एक होता है, पोर्टफोलियो में शामिल शेयर भी वही होते हैं। लेकिन जब बात लॉन्ग टर्म रिटर्न की आती है, तो इन दोनों के बीच लाखों रुपए का अंतर पैदा हो जाता है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि रेगुलर और डायरेक्ट म्यूचुअल फंड में क्या अंतर होता है, 1% की बचत से आपकी वेल्थ पर क्या असर पड़ता है और आपको किस ऑप्शन में पैसा लगाना चाहिए।

क्या होता है रेगुलर म्यूचुअल फंड?

रेगुलर म्यूचुअल फंड वह प्लान होता है जिसे आप किसी मध्यस्थ जैसे- म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर, बैंक, एजेंट या फाइनेंशियल एडवाइजर के जरिए खरीदते हैं। इस प्लान में एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) आपके निवेश पर डिस्ट्रीब्यूटर को हर साल एक निश्चित कमीशन देती है। यह कमीशन अलग से नहीं लिया जाता, बल्कि फंड के एक्सपेंस रेशियो में जुड़ जाता है। इस वजह से रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो डायरेक्ट प्लान के मुकाबले हमेशा ज्यादा होता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें