यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा। सरकार के सूत्रों ने 16 सितंबर को यह बताया। एनपीसीआई ने 15 सितंबर को 2000 रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने का ऐलान किया।

यूपीआई ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं होगा। सरकार के सूत्रों ने 16 सितंबर को यह बताया। एनपीसीआई ने 15 सितंबर को 2000 रुपये से ज्यादा वैल्यू के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने का ऐलान किया।
एमडीआर चार्ज का फैसला वापस नहीं लेगी सरकार
सरकार क्या 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शंस पर 0.4 फीसदी एमडीआर लगाने का फैसला वापस लेगी? इस सवाल के जवाब में एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस बारे में फैसला लिया जा चुका है और इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
एमडीआर चार्ज से यूपीआई सिस्टम को फायदा
सूत्रों ने बताया कि एमडीआर चार्ज लगाने का फैसला यूपीआई ईकोसिस्टम के हित में लिया गया है। इसका मकसद यूपीआई की सेफ्टी और सिक्योरिटी को मजबूत बनाना है। सूत्रों ने यह भी कहा कि 2020 में यूपीआई शुरू होने पर दूसरे देशों की तरह लेवी लगाने का फैसला लिया गया था। नए एमडीआर फ्रेमवर्क से यूपीआई को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कई पक्षों ने एमडीआर चार्ज का किया विरोध
यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज लगाने का कई पक्षों ने विरोध किया है। इनमें ट्रेडर्स, दुकानदार और राजनीतिक दल शामिल हैं। राजनीतिक दलों ने इसे 'मोदी टैक्स' बताया है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया है।
एमडीआर चार्ज से यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी
सरकार ने एमडीआर चार्ज लगाने के फैसले का बचाव करते हुए 15 सितंबर को कहा कि इससे रूरल और सेमी अर्बन एरिया में यूपीआई के विस्तार में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि यूपीआई से होने वाले ज्यादातर पेमेंट्स को फ्री बनाए रखा गया है।
संसद की समिति ने यूपीआई को फ्री रखने का समर्थन नहीं किया था
फाइनेंस पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा था कि 'जीरो यूपीआई रीजीम' से सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ता है। इससे लॉन्ग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने की यूपीआई ईकोसिस्टम की क्षमता भी सीमित बनी रहती है। उसने यूपीआई को वित्तीय रूप से सस्टेनेबल बनाए रखने के लिए व्यावहारिक रेवेन्यू की व्यवस्था शुरू करने की सलाह दी थी।
यूपीआई सिस्टम पर सरकार को सालाना 2000 करोड़ खर्च करना पड़ता है
समिति ने यह भी कहा था कि यूपीआई पेमेंट ईकोसिस्टम की मदद के लिए सरकार सालाना 2000 करोड़ रुपये खर्च करती है। करीब 6 सालों तक पूरी तरह से फ्री रहने के बाद यूपीआई अब चार्जेबल हो जाएगा। एमडीआर चार्ज 15 अक्तूबर से लागू हो जाएगा। हालांकि, चार्ज के दायरे में 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन आएंगे। कस्टमर्स को यह चार्ज नहीं चुकाना होगा।
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