Diwali 2023: मुगलों के समय से मशहूर हैं मिठाई की ये दुकानें, क्या आपने इनमें से चखी है कोई!
Diwali 2023: दिवाली पर मिठाई खरीदने का अपना महत्व और मललब होता है। देश में देसी मिठाइयों की अपनी जगह है। बंगाल का संदेश हो या बंगाली मिठाई, सोनपापड़ी, काजू बर्फी, बेसन के लड्डू फेमस है।चाहे वह कोई त्योहार हो, शादी हो, बच्चे का जन्मदिन हो, बच्चे का नामकरण हो या कार या घर जैसी कोई नई खरीदारी हो, मिठाई के साथ 'मुंह मीठा' करना बनता है
Diwali 2023: देश में देसी मिठाइयों की अपनी जगह है।
Diwali 2023: दिवाली पर मिठाई खरीदने का अपना महत्व और मललब होता है। देश में देसी मिठाइयों की अपनी जगह है। बंगाल का संदेश हो या बंगाली मिठाई, सोनपापड़ी, काजू बर्फी, बेसन के लड्डू फेमस है।चाहे वह कोई त्योहार हो, शादी हो, बच्चे का जन्मदिन हो, बच्चे का नामकरण हो या कार या घर जैसी कोई नई खरीदारी हो, मिठाई के साथ 'मुंह मीठा' करना बनता है। यदि आप उन लोगों में से हैं जिनका दिल अच्छे पुराने बेसन के लड्डू, मुंह में घुल जाने वाले पेड़े, स्वादिष्ट बर्फी और स्वादिष्ट काजू कतली के लिए धड़कता है, तो यहां भारत की कुछ सबसे पुरानी मिठाई की दुकानें हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं।
भगत हलवाई, आगरा
आगरा की यह संस्था 1795 से आम लोगों को अपनी मिठाई खिला रही है। भारत हलवाई को लेख राज भगत ने स्थापित किया तब इसकी शुरुआत पूड़ी सब्जी, बर्फी, जलेबी और रबड़ी बेचने से हुई। आज वे आटा, दूध, नारियल पाउडर, सूखे मेवे और ढेर सारे घी से बनी अपनी स्पेशल डोडा बर्फी के लिए फेमस हैं। मिठाई बनाने वाले इस ब्रांड ने अब बेक्ड मिठाई भी ला रहा है।
पंजाबी घसीटाराम हलवाई, मुंबई
मुंबई में इस चीनी एम्पोरियम की स्थापना 1916 में घसीटाराम बजाज ने की थी। हालांकि, उनकी विशेषता ‘dry fruit anarkali’ और ‘ice halwa’ है। इसके अलावा मलाई बर्फी और गुझिया भी फेमस है। इनके देश भर में 12 आउटलेट हैं लेकिन माहिम स्टोर काफी फेमस है।
केसी दास, कोलकाता
केसी दास रोशोगुल्ला (Rasgulla) का पर्याय है जिसे के.सी. द्वारा बनाया गया था। दास के पिता नोबिन चंद्र दास जिन्होंने 1866 में मिठाई की दुकान शुरू की थी। यहां अलग-अलग तरह की बंगाली मिठाई बनाई जाती है। इसमें रोशोमलाई, चमचम, लालमोहन, मिस्टी दही, प्रभु भोग आदि शामिल है। अभी भी यहां स्टार मिठाई गुलाब जामुन, सोंदेश और सोन पापड़ी के साथ रसगुल्ला है। केसी दास ने साल 1930 में भारत की पहली डिब्बाबंद मिठाई - डिब्बाबंद रसगुल्ला शुरू किया था। इनके कोलकाता में आठ आउटलेट हैं और कुछ बंगलुरु और चेन्नई में भी हैं।
पारसी डेयरी फार्म, मुंबई
1916 में प्रिंसेस स्ट्रीट में पारसी डेयरी फार्म शुरू करने वाले नरीमन अर्देशिर ने 1980 के दशक में मुंबई में दही भी पेश किया। एक सदी से भी अधिक समय के बाद यह ब्रांड आज मिठाई और कई डेयरी आवश्यक प्रोडक्ट की 80 किस्मों का दावा करता है।
बाशा हलवावाला, ट्रिप्लिकेन, चेन्नई
84 साल पुरानी यह मिठाई की दुकान हलवा प्रेमियों को चेन्नई के ट्रिप्लिकेन में लुभा रही है। वे एक दर्जन से ज्यादा तरह की मिठाई बना रहे है। ये दम का रोत, क्रस्टी टॉप के साथ एक शहद भूरे रंग का हलवा, जो यहां की खासियत है, इसके लिए फेमस है। हलवे को कोयले से जलने वाले चूल्हे पर पकाया जाता है और ऊपर से खरबूजे के बीज डाले जाते हैं। परतदार सोन पापड़ी, रसदार मोटी जांगड़ी, मुंह में घुल जाने वाला मैसूर पाक और बाडूसा भी हैं।
चैना राम सिंधी कन्फेक्शनर्स, चांदनी चौक, नई दिल्ली
मूल रूप से लाहौर के अनारकली बाजार की यह दुकान 1947 में विभाजन के बाद चांदनी चौक में ट्रांसफर हो गई है। यहां की मिठाइयां देसी घी में टपकती हैं लेकिन बहुत स्वादिष्ट होती हैं। चबाने लायक और स्वादिष्ट कराची हलवा यहां सबसे ज्यादा बिकता है। इसके अलावा सेव पाक, पिन्नी, बेसन के लड्डू, बर्फी, पतीसा और सोन पापड़ी भी फेमस है।
कंवरजी, चांदनी चौक, नई दिल्ली
1850 में लाला कंवर सेन की स्थापित कंवरजी आज भी चांदनी चौक की पुरानी पराठे वाली गली में खड़े हैं। वह अपने पिस्ता लौज, गुलाब जामुन, मून दाल बर्फी, मिश्री मावा, घेवर, काजू कतली, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू और बीकानेरी बर्फी के लिए फेमस है। यहां का घेवर शानदार है। नमकीन और नमकीन स्नैक्स की भी अपनी रेन्ज है।
आनंद स्वीट्स, बैंगलुरू
बंगलुरु स्थित परिवार द्वारा संचालित इस मिठाई ब्रांड की स्थापना 1988 में आनंद दयाल दादू ने की थी। यह अपनी काजू कतली, बादामिका और स्मोकी, पौष्टिक मैसूर पाक के लिए भी जाना जाता है।
पंजाबी चंदू हलवाई, मुंबई
1896 में चंदूलाल बहल द्वारा स्थापित यह मिठाई की दुकान 1947 में विभाजन के बाद कराची से मुंबई चली आई। उनके कलाकंद, गुलाब जामुन और मालपुआ बेहद लोकप्रिय हैं। लेकिन अगर कोई एक चीज है जिसे आप पंजाबी चंदू हलवाई में मिस नहीं कर सकते हैं तो वह है सिंधी जलेबी जिसे घीर के नाम से जाना जाता है। चीनी की चाशनी में डूबा हुआ और ऊपर से पिस्ते की कतरनें डालकर यह एक ही बार में कुरकुरा, रसदार और चाशनी से भर जाता है।