Diwali Home Buying Tips: दिवाली पर नया घर खरीदने का प्लान? समझिए EMI के अलावा 5 बड़े खर्च, जो बिगाड़ सकते हैं आपका बजट

Diwali Home Buying Tips: दिवाली पर घर खरीदने का सपना पूरा करने से पहले खर्चों का पूरा हिसाब लगा लें। ₹80 लाख के घर में डाउन पेमेंट के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, इंटीरियर और दूसरे चार्ज पर लाखों रुपये लग सकते हैं। जानिए बजट कैसे बनाएं।

अपडेटेड Oct 30, 2026 पर 6:01 AM
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घर खरीदते समय इंश्योरेंस का खर्च भी समझना जरूरी है।

Diwali Home Buying Tips: बहुत से लोग दिवाली पर घर खरीदने का वर्षों पुराना सपना पूरा करते हैं। आपने प्रॉपर्टी पसंद कर ली। डाउन पेमेंट का इंतजाम भी कर दिया। बैंक से होम लोन मिल रहा है और EMI भी आपकी जेब के हिसाब से है। ऐसे में घर खरीदने का फैसला आसान लग सकता है। लेकिन सिर्फ EMI के हिसाब से बजट बनाना भारी पड़ सकता है।

घर खरीदने में स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, लोन प्रोसेसिंग फीस और इंटीरियर जैसे कई खर्च भी होते हैं। इन पर लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं। इसलिए प्रॉपर्टी फाइनल करने से पहले इन खर्चों का हिसाब लगाना जरूरी है।

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा के मुताबिक, घर खरीदने से पहले EMI के साथ उन खर्चों को भी बजट में शामिल करना चाहिए, जो अक्सर शुरुआती हिसाब-किताब में छूट जाते हैं।


1. डाउन पेमेंट के बाद इमरजेंसी फंड बचाएं

मान लीजिए, आप ₹80 लाख का घर खरीद रहे हैं। आप ₹16 लाख डाउन पेमेंट देते हैं और बाकी ₹64 लाख का होम लोन लेते हैं। अगर बैंक लोन मंजूर कर देता है, तो 8.5% ब्याज दर और 20 साल की अवधि पर आपकी EMI करीब ₹55,500 महीने होगी।

यह हर महीने की बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन यहां एक और सवाल जरूरी है। डाउन पेमेंट देने के बाद आपके पास कितनी बचत बचेगी?

अगर आप अपनी सारी जमा पूंजी घर खरीदने में लगा देते हैं, तो अचानक कोई खर्च आने या नौकरी से कमाई रुकने पर परेशानी हो सकती है। अतुल मोंगा के मुताबिक, घर खरीदने के लिए रखे पैसे से अलग 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड रखना चाहिए।

2. स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च

घर की कीमत ही आपकी कुल लागत नहीं होती। प्रॉपर्टी खरीदते समय स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च भी देना पड़ता है। इसकी दर राज्य, खरीदार की श्रेणी और लागू नियमों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर ये दोनों खर्च प्रॉपर्टी की कीमत के 5 से 8% तक हैं, तो ₹80 लाख के घर पर आपको ₹4 लाख से ₹6.4 लाख अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं।

आमतौर पर यह रकम अलग से चुकानी पड़ती है और होम लोन से इसका पूरा भुगतान हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए डाउन पेमेंट का इंतजाम करते समय इन खर्चों को भी जोड़ लें।

3. होम लोन की प्रोसेसिंग फीस भी जोड़ें

होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग ब्याज दर पर ध्यान देते हैं। लेकिन प्रोसेसिंग फीस, कानूनी जांच और प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन जैसे दूसरे चार्ज भी लग सकते हैं।

अतुल मोंगा का कहना है कि अगर ₹64 लाख के होम लोन पर प्रोसेसिंग फीस 0.5% है, तो यह ₹32,000 होगी। इस पर लागू टैक्स और दूसरे चार्ज अलग हो सकते हैं।

अलग-अलग बैंक और लोन देने वाली कंपनियों की फीस अलग होती है। कुछ मामलों में छूट भी मिल सकती है। इसलिए लोन फाइनल करने से पहले सभी चार्ज की जानकारी लें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर फैसला करना जल्दबाजी हो सकती है।

4. इंश्योरेंस पर भी खर्च हो सकता है

घर खरीदते समय इंश्योरेंस का खर्च भी समझना जरूरी है। होम इंश्योरेंस घर को कुछ तरह के नुकसान से सुरक्षा देता है। वहीं, लाइफ या लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस कुछ परिस्थितियों में बकाया होम लोन चुकाने में मदद कर सकता है।

दोनों का काम अलग है। इनका प्रीमियम पॉलिसी, कवरेज और बीमा कंपनी पर निर्भर करता है। इसलिए पता करें कि बैंक कौन-सा इंश्योरेंस जरूरी मानता है और कौन-सा विकल्प आपके लिए वैकल्पिक है। पॉलिसी की शर्तें और उसमें शामिल नहीं होने वाले जोखिम भी ध्यान से पढ़ें।

5. इंटीरियर, शिफ्टिंग और मेंटेनेंस का खर्च

घर की चाबी मिलना खरीदारी का आखिरी खर्च नहीं है। घर में रहने लायक बनाने के लिए पेंटिंग, फर्नीचर, बिजली की फिटिंग, घरेलू उपकरण और छोटी-मोटी मरम्मत पर भी पैसा खर्च होता है। इसके अलावा सामान शिफ्ट करने का खर्च भी जुड़ता है।

अतुल मोंगा के मुताबिक, प्रॉपर्टी की हालत और जरूरतों के हिसाब से इन कामों पर ₹3 लाख से ₹8 लाख या इससे ज्यादा खर्च हो सकता है। ₹80 लाख के घर के हिसाब से यह रकम उसकी कीमत का करीब 4 से 10% बैठती है।

इसके अलावा सोसायटी मेंटेनेंस चार्ज, सिक्योरिटी डिपॉजिट और घर का कब्जा लेते समय लगने वाले दूसरे भुगतान भी हो सकते हैं। अलग-अलग देखें तो ये खर्च छोटे लगते हैं, लेकिन एक साथ जुड़ने पर बजट बिगाड़ सकते हैं। इसलिए इनका इंतजाम पहले ही कर लें। घर खरीदने के तुरंत बाद क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन पर निर्भर होना परेशानी बढ़ा सकता है।

घर खरीदने से पहले पूरा बजट बनाएं

₹80 लाख के घर के उदाहरण में ₹16 लाख डाउन पेमेंट का लगेगा। ₹4 लाख से ₹6.4 लाख स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन में जाएंगे। और ₹3 लाख से ₹8 लाख इंटीरियर व शिफ्टिंग पर खर्च हो सकते हैं। यानी इन खर्चों को जोड़ने पर शुरुआती रकम करीब ₹23 लाख से ₹30.4 लाख तक पहुंच सकती है। इसमें इंश्योरेंस और होम लोन के अन्य चार्ज शामिल नहीं हैं।

इसके अलावा हर महीने करीब ₹55,500 की EMI भी चुकानी होगी। इसलिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि बैंक आपको कितना लोन दे रहा है और EMI कितनी बनेगी।

अतुल मोंगा का कहना है कि घर खरीदने से पहले शुरुआती खर्चों और कब्जा मिलने के बाद होने वाले खर्चों का पूरा हिसाब लगाना चाहिए। साथ ही, इमरजेंसी फंड को अलग रखना भी जरूरी है। ताकि घर खरीदने के बाद आर्थिक चुनौतियों से आसानी से निपटा जा सके।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

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