आजकल घर, गाड़ी या बिजनेस के लिए लोन लेना आम बात हो गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि सिक्योर्ड लोन लें जिसमें संपत्ति गिरवी रखनी पड़े, या अनसिक्योर्ड जिसमें कोई गारंटी न दें। दोनों के फायदे-नुकसान अलग हैं, गलत चुनाव से कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। सही जानकारी से ही बजट में फिट लोन चुनें।
सिक्योर्ड लोन में बैंक को घर, जमीन, गोल्ड या FD जैसी संपत्ति गिरवी रखते हैं। अगर EMI न चुकाने पर बैंक उसे बेचकर पैसा वसूल लेता है। इसलिए ब्याज दर कम (8-12%) होती है, बड़ी रकम (कई करोड़ तक) और लंबी अवधि (15-25 साल) मिलती है। होम लोन, कार लोन, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी इसके उदाहरण हैं। अच्छे क्रेडिट स्कोर के बिना भी अप्रूवल आसान है।
यहां कोई गिरवी नहीं, बैंक आय, नौकरी और CIBIL स्कोर देखता है। पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड या एजुकेशन लोन इसके प्रकार हैं। ब्याज ऊंचा (12-30%) क्योंकि बैंक का रिस्क ज्यादा होता है। राशि सीमित (50 लाख तक), अवधि छोटी (1-5 साल) हो सकती है। अच्छा स्कोर (750+) होना जरूरी है।
फायदे: 1-2 दिन में पैसा, कोई संपत्ति दांव पर नहीं, न्यूनतम कागज हैं। नुकसान: महंगी EMI, कम रकम। इमरजेंसी जैसे शादी-मेडिकल के लिए उपयुक्त हैं।
ब्याज-EMI और सही चुनाव का फॉर्मूला
उदाहरण: 10 लाख होम लोन पर सालाना ब्याज 9% vs पर्सनल लोन 15%—सिक्योर्ड में कुल चुकौनी कम है। लेकिन अगर संपत्ति नहीं तो अनसिक्योर्ड ही रास्ता है। आय का 50% से ज्यादा EMI न रखें। लोन से पहले ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, प्री-पेमेंट चार्ज चेकें। EMI कैलकुलेटर यूज करें। समय पर भुगतान से स्कोर मजबूत रखें। सलाहकार या फिनटेक ऐप्स की मदद लें। सिक्योर्ड लंबे लक्ष्य, अनसिक्योर्ड शॉर्ट टर्म जरूरत के लिए चुनें।