ITR Filing 2026: न्यू टैक्स रीजीम में में भी बचा सकते हैं टैक्स, जानिए 5 आसान तरीके

ITR Filing 2026: नई टैक्स व्यवस्था में छूट कम जरूर हैं, लेकिन टैक्स बचाने के मौके पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सही सैलरी स्ट्रक्चर और समझदारी से टैक्स कैलकुलेशन करके नौकरीपेशा लोग अब भी अच्छी बचत कर सकते हैं। जानिए 5 आसान तरीके।

अपडेटेड May 27, 2026 पर 11:10 PM
नई टै्स व्यवस्था में नौकरीपेशा लोगों और पेंशनभोगियों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है।

ITR Filing 2026: नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) लागू होने के बाद से कई नौकरीपेशा लोगों की शिकायत रही है कि इसमें टैक्स बचाने के विकल्प काफी सीमित हैं। पुरानी टैक्स व्यवस्था में सेक्शन 80C, 80D, HRA, LTA, होम लोन के ब्याज और कई अन्य छूटों का फायदा मिलता था, जो नई व्यवस्था में उपलब्ध नहीं हैं।

हालांकि सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना था। इसी वजह से नई व्यवस्था में टैक्स दरें कम रखी गईं और टैक्स स्लैब को भी ज्यादा आकर्षक बनाया गया। बजट 2025 में सरकार ने 12.75 लाख रुपये तक की आय को टैक्स मुक्त कर मध्यम वर्ग को बड़ी राहत भी दी।

इसके बावजूद नई टैक्स व्यवस्था में कुछ ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिनकी मदद से नौकरीपेशा लोग अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं।

  1. मील वाउचर का फायदा उठाएं


अगर आपकी कंपनी सैलरी पैकेज में मील वाउचर या फूड बेनिफिट देती है, तो इसका फायदा लेना चाहिए। नई टैक्स व्यवस्था में भी यह टैक्स बचत का एक उपयोगी तरीका माना जाता है और इससे आपकी टैक्स देनदारी कुछ हद तक कम हो सकती है।

2. NPS में कंपनी के योगदान का लाभ लें

नई टैक्स व्यवस्था में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में नियोक्ता द्वारा किया गया योगदान सेक्शन 80CCD(2) के तहत टैक्स छूट के लिए पात्र है। इसलिए अगर आपकी कंपनी NPS योगदान की सुविधा देती है, तो इसका लाभ उठाना समझदारी हो सकती है।

3. पुरानी और नई टैक्स रीजीम की तुलना

कई लोग बिना कैलकुलेशन किए नई टैक्स व्यवस्था चुन लेते हैं। लेकिन हर व्यक्ति की आय, निवेश और वित्तीय स्थिति अलग होती है। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स का कैलकुलेशन करके यह देखना जरूरी है कि किस विकल्प में कम टैक्स देना पड़ रहा है।

4. वित्त वर्ष की शुरुआत में ही विकल्प चुनें

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष की शुरुआत में या नई नौकरी जॉइन करते समय अपनी पसंद की टैक्स व्यवस्था के बारे में नियोक्ता को बता देना चाहिए। इससे TDS सही तरीके से कटता है और बाद में अतिरिक्त टैक्स या रिफंड से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं।

5. ITR भरने से पहले दोबारा गणना करें

रिटर्न दाखिल करने से पहले एक बार फिर दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में अपनी टैक्स देनदारी की कैलकुलेशन कर लेना बेहतर रहता है। कई बार साल के दौरान आय या निवेश में बदलाव होने से अंतिम टैक्स देनदारी बदल सकती है। ऐसे में सही विकल्प चुनकर अतिरिक्त टैक्स बचाया जा सकता है।

नई टैक्स व्यवस्था में कौन-कौन सी छूट

नई टै्स व्यवस्था में नौकरीपेशा लोगों और पेंशनभोगियों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। NPS में नियोक्ता के योगदान पर भी टैक्स छूट मिलती है। फैमिली पेंशन पर कटौती का लाभ मिलता है। लीव एनकैशमेंट पर भी राहत दी जाती है।

कुछ विशेष परिवहन भत्ते टैक्स फ्री रहते हैं। गृह संपत्ति से जुड़ी कुछ कटौतियां भी उपलब्ध हैं। रिटायरमेंट पर मिलने वाली 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी टैक्स मुक्त रहती है। VRS के तहत 5 लाख रुपये तक की राशि पर भी टैक्स नहीं लगता। इसके अलावा एक वित्त वर्ष में 50,000 रुपये तक के उपहार भी टैक्स मुक्त रहते हैं।

कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर?

इस सवाल का जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। अगर आपके पास HRA, 80C, 80D, होम लोन ब्याज जैसी बड़ी कटौतियां हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। वहीं जिन लोगों के पास ज्यादा कटौतियां नहीं हैं, उनके लिए नई टैक्स व्यवस्था बेहतर साबित हो सकती है।

इसलिए अंतिम फैसला लेने से पहले दोनों रीजीम में में टैक्स कैलकुलेशन करें और उसी विकल्प को चुनें जिसमें आपकी कुल टैक्स देनदारी कम बनती हो।

ITR भरते समय रखें खास सावधानी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही आयकर विभाग प्री-फिल्ड ITR फॉर्म उपलब्ध कराता हो, लेकिन सही और पूरी जानकारी देना करदाता की जिम्मेदारी है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले अपनी आय, टैक्स कटौती और अन्य डिटेल की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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