रूस-यूक्रेन तनाव बढ़ने से भारतीय बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिल रही है। निफ्टी 250 अंक गिरकर 17000 के नीचे आ गया है तो निफ्टी बैंक भी 500 अंक टूटा है। मिड और स्मॉलकैप शेयरों की भी जोरदार पिटाई हुई है। रूस-यूक्रेन में टकराव बढ़ने से ग्लोबल बाजारों में गिरावट आई है। Dow Futures 450 अंक नीचे है। वहीं, Hong Kong और Nikkei 3 फीसदी तक टूटे हैं। रूसी बाजार आज फिर 10 फीसदी गिरा है। रूसी बाजार 3 दिनों में 24 फीसदी फिसला है। उधर क्रूड में उछाल आया है। ब्रेंट 97 डॉलर के पार निकल गया है। सोना भी चमका है।
पूरे बाजार की नजर सिर्फ और सिर्फ रूस पर टिकी है जिसने कल रात एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्वी यूक्रेन के दो अलग क्षेत्रों को अलग देश की मान्यता दे दी। इससे पूरे इलाके में तनाव और गहरा गया। मामला बिगड़ता देख UN में मामले पर आपात बैठक भी हुई। इसी घटनाक्रम ने पूरे ग्लोबल बाजारों में डर का नया माहौल बना दिया है।
रूस और यूक्रेन के तनाव का भारतीय कंपनियों पर कैसा होगा असर और रूस में किन कंपनियों कितना है एक्सपोजर आइए जानते हैं। रूस में भारतीय फार्मा कंपनियों का बड़ा एक्सपोजर है। Dr Reddy की बिक्री का 8-10% हिस्सा रूस से आता है। Nise, Omez, Nasivin, Cetrine, Ibuclin रूस में बिकने वाले 200 बेस्ट सेलिंग फार्मा प्रोडक्ट में आते हैं। रूस से Glenmark की बिक्री का 9-10%,Cadila का 10-11% और Sun Pharma की बिक्री का 10-13% हिस्सा आता है।
इसके अलावा तेल-गैस और डिफेंस से जुड़ी तमाम कंपनियों का रूस में बड़ा एक्सपोजर है। ONGC Videsh का Sakhalin-I प्रोजेक्ट में बड़ा निवेश है। इसी तरह ONGC का Rosneft के साथ करार है। यूक्रेन संकट ने कच्चे तेल के दाम 7.5 साल की उंचाई पर पहुंच गए है। ऐसे में HPCL के CMD मुकेश कुमार सुराणा ने CNBC TV18 से खास बातचीत में कहा की रूस-यूक्रेन संकट और OPEC+ से उत्पादन बढ़ाने के फैसले पर देरी से ये उछाल आया है। मौजूदा हालात में 3 ट्रिगर कच्चे तेल के लिए अहम हैं। रूस-यूक्रेन संकट और उत्पादन पर फैसले में देरी से ये उछाल आया है। कच्चे तेल के दाम में तेजी रहने की आशंका है। US-ईरान बातचीत से सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। दुनियाभर में 9 लाख बैरल/दिन की शॉर्टेज है। सप्लाई को लेकर अभी कोई दिक्कतें नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल शुरू होने से मांग और बढ़ेगी।
डिफेंस सेक्टर की बात करें तो HAL का रूस की कंपनियों के साथ 2 ज्वाइंट वेंचर है। ये ज्वाइंट वेंचर एयरोस्पेस और एविएशन के क्षेत्र में है। वहीं, BDL ने Almaz Antey के साथ भारत में Tunguska, Kavadrat,OSA-AKA और Pechora air जैसी एयर डिफेंस मिसाइस सिस्टम बनाने के लिए JVs की संभावनाएं तलाशने के लिए करार कर रखा है। इसके साथा ही शिल्का सेल्फ-प्रोपेल्ड एयर डिफेंस सिस्टम (Shilka self-propelled air defence gun system) को देश में बनाने लिए जेवी की संभावना तलाशी जा रही है।
यूक्रेन की 70% जमीन खेती के लिए डेडिकेटेड है। गेहूं के एक्सपोर्ट में रूस और यूक्रेन का चौथाई फीसदी योगदान है। यूक्रेन दुनिया का 5वां सबसे बड़ा गेहूं एक्सपोर्ट करने वाला देश है। 14 देश यूक्रेन के गेहूं के इंपोर्ट पर निर्भर करते हैं। 14 में से आधे देशों में खाद्यान की गंभीर समस्या है। ग्लोबल मक्का एक्सपोर्ट में यूक्रेन की हिस्सेदारी 17% है। ये दुनिया का चौथा बड़ा मक्का एक्सपोर्टर देश है।
रूस-यूक्रेन तनाव,शराब शेयरों पर कितना असर?
बता दें कि रूस-यूक्रेन तनाव से शराब शेयरों पर भी दबाव पड़ने की उम्मीद है। यूक्रेन दुनिया के 5 टॉप बार्ली (जौ) उत्पादकों में शामिल है। CY22 में बार्ली एक्सपोर्ट में यूक्रेन का 18% हिस्सा था। तनाव बढ़ने से बार्ली के सप्लाई पर असर पड़ेगा। भारत में बार्ली के स्पॉट प्राइस सालाना आधार पर 60% बढ़े हैं। भारतीय कंपनियां बार्ली के घरेलू मार्केट पर निर्भर हैं। यूक्रेन संकट से सप्लाई पर असर की अशंका है। यूक्रेन संकट से बार्ली की घरेलू कीमतें भी चढ़ेंगी।
इसको ध्यान में रखते हुए MOSFLने UNITED BREWERIES पर Sell रेटिंग देते हुए इसके लिए 1,200 रुपए का लक्ष्य दिया है। MOSFL का कहना है कि कंपनी के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। ऊंची फ्यूल कीमतें से बॉटलिंग का खर्च बढ़ सकता है। FY21 में कच्चे माल में बॉटलिंग का हिस्सा 61% था। 4QFY22 में बार्ली कीमतें सालाना आधार पर 62.5% बढ़ीं हैं। यूक्रेन संकट से कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ेगी।