अगर आप रोजाना की नौकरी की भागदौड़ से थक चुके हैं और मन में सवाल उठता है कि कब तक काम करना है, तो इसका जवाब सिर्फ भावनाओं में नहीं, बल्कि गणित में छिपा है। इसे कहते हैं फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस नंबर (FIN) यानी वह रकम जो आपके पास होनी चाहिए ताकि आप बिना नौकरी के भी आराम से जीवन जी सकें।
फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस नंबर क्या है?
यह वह कुल धनराशि है जो आपके खर्चों को लंबे समय तक संभाल सके। इसमें आपके मासिक खर्च, महंगाई का असर, मेडिकल जरूरतें और जीवनशैली की पसंद शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपके मासिक खर्च 50,000 रुपये हैं, तो सालाना खर्च हुआ 6 लाख रुपये। अब अगर आप चाहते हैं कि अगले 25 साल तक बिना नौकरी के यह खर्च चलता रहे, तो आपको कम से कम 1.5 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी।
1. खर्च का आकलन करें: सबसे पहले अपनी मासिक जरूरतें तय करें किराया, EMI, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल और लाइफस्टाइल।
2. महंगाई जोड़ें: मान लीजिए महंगाई दर 6% है, तो आने वाले सालों में खर्च बढ़ेगा।
3. निवेश की योजना बनाएं: अगर आपके निवेश से औसतन 10% रिटर्न मिलता है, तो यह महंगाई को मात देकर आपके खर्च पूरे कर सकता है।
राहुल, 35 साल का आईटी प्रोफेशनल, चाहता है कि 50 की उम्र में नौकरी छोड़ दे। उसका मासिक खर्च 60,000 रुपये है। महंगाई और भविष्य की जरूरतों को जोड़कर उसका फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस नंबर लगभग 3 करोड़ रुपये निकलता है। अब राहुल को अगले 15 साल में निवेश और बचत के जरिए इस रकम तक पहुंचना होगा।
- यह आपको स्पष्ट लक्ष्य देता है।
- नौकरी छोड़ने का फैसला भावनाओं पर नहीं, ठोस आंकड़ों पर आधारित होता है।
- निवेश और बचत की दिशा तय होती है।
9 से 5 नौकरी छोड़ने का सपना तभी हकीकत बनेगा जब आपके पास सही वित्तीय तैयारी होगी। फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस नंबर आपका रोडमैप है यह बताता है कि कितनी रकम जुटानी है और किस तरह निवेश करना है।