क्या दिल्ली में रहने के लिए हर महीने 50,000 रुपये काफी रहेंगे? हर महीने सैलरी आते ही लगता है कि इस बार ज्यादा सेविंग होगी, लेकिन कुछ ही दिनों में अकाउंट खाली सा दिखने लगता है। अगर आप भी यही सोचते हैं कि पैसे आते तो हैं, पर टिकते नहीं हैं। तो अब समय है स्मार्ट तरीके से बजट बनाने का।
ये फॉर्मूला पैसे बचाने में आएगा काम
दिल्ली-एनसीआर जैसे महंगे शहर में अगर आपकी कमाई करीब 50,000 रुपये है, तो एक आसान नियम आपकी मदद कर सकता है। इसे 50-30-20 रूल कहा जाता है, जिसे यहां थोड़ा बदलकर अपनाने की सलाह दी गई है। इसके अनुसार 50-55 प्रतिशत पैसे जरूरी खर्चों पर, 20-25 प्रतिशत शौक पर और 20-25 प्रतिशत बचत व निवेश में रखने चाहिए।
जरूरी खर्चों में किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट और बिल शामिल होते हैं। इन पर करीब 25,000 से 27,500 रुपये तक खर्च करना सही माना गया है। जैसे किराया 10,000 से 15,000 रुपये, खाने पर 6,000 से 8,000 रुपये और बाकी खर्च ट्रांसपोर्ट व बिल में जाते हैं।
कैसे करें सेविंग और निवेश?
वहीं लाइफस्टाइल खर्च जैसे बाहर खाना, शॉपिंग, मूवी या घूमना-फिरना 10,000 से 12,500 रुपये के बीच रखना बेहतर रहता है। इससे जिंदगी का मजा भी बना रहता है और खर्च भी कंट्रोल में रहता है। सबसे अहम हिस्सा है सेविंग और निवेश। हर महीने कम से कम 10,000 से 12,500 रुपये बचाने की कोशिश करनी चाहिए। इसमें इमरजेंसी फंड, म्यूचुअल फंड (SIP) और सेविंग्स शामिल करें। कमाई से ज्यादा जरूरी है सही प्लानिंग। अगर पैसे को सही दिशा दी जाए, तो 50,000 रुपये में भी मजबूत फाइनेंशियल फ्यूचर बनाया जा सकता है।