कई लोन ऐसे इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में इनवेस्ट करना चाहते हैं, जिनमें अच्छे रिटर्न के साथ टैक्स-सेविंग्स की सुविधा हेती है। म्यू्चुअल फंड की टैक्स सेविंग्स स्कीम और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) दोनों टैक्स-सेविंग्स के साथ अच्छे रिटर्न देते हैं। सवाल है कि दोनों में से बेस्ट कौन है?
NSC और ELSS में से कौन बेहतर?
नोएडा की श्वेता जैन ने ऐसा एक सवाल पूछा है। उन्होंने बताया है कि वह 28 साल की है और इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करती हैं। वह 10 साल के लिए इनवेस्ट करना चाहती हैं। उनका सवाल है कि उन्हें ईएलएसएस यानी म्यूचुअल फंड की टैक्स सेविंग्स स्कीम और एनएससी में से किसमें इनवेस्ट करना चाहिए। मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।
सेक्शन 80सी के तहत मिलता है डिडक्शन
जैन ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स-सेविंग्स के कई ऑप्शंस हैं। इनमें बैंक टैक्स-सेविंग्स फिक्स्ड डिपॉजिट, ईएलएसएस आदि शामिल है। टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में इन ऑप्शंस में इनवेस्ट कर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं। किसी इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट में निवेश का फैसला कई बातों पर निर्भर करता है। इनमें इनवेस्टर के रिस्क लेने की क्षमता, निवेश की अवधि और लिक्विडिटी प्रमुख हैं।
लंबी अवधि के निवेश के लिए ELSS में ज्यादा फायदा
उन्होंने कहा कि एनएससी एक फिक्स्ड रिटर्न स्कीम है। इसमें निवेश करने पर अगले 5 साल के लिए तय रेट से इंटरेस्ट मिलता है। चूंकि श्वेता जैन 10 साल के लिए इनवेस्ट करना चाहती हैं तो उनके लिए म्यूचुअल फंड की टैक्स-सेविंग्स स्कीम में निवेश करना सही रहेगा। इसे इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) भी कहा जाता है। यह स्कीम एक तरह से म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम जैसी है। लंबी अवधि में इसमें एनएससी के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। इसमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है।
कम अवधि के निवेश के लिए एनएससी सही विकल्प
जैन ने कहा कि तीन साल के बाद ईएलएसएस से पैसे निकाले जा सकते हैं। लेकिन, अगर इस स्कीम का रिटर्न अच्छा है तो निवेश को लंबी अवधि तक जारी रखा जा सकता है। ईएलएसएस या किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड की स्कीम में कम से कम 10 साल तक निवेश करने पर अच्छा रिटर्न मिल जाता है। चूंकि जैन की उम्र कम है तो वह ईएलएसएस में निवेश कर सकती हैं। लेकिन, जो इनवेस्टर्स कम समय यानी 7 साल से कम सालों के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए एनएससी सही है।
ईएलएसएस में सिप के जरिए किया जा सकता है निवेश
उन्होंने कहा कि जैन ईएलएसएस में निवेश के लिए सिप का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट वह म्यूचुअल फंड की ईएलएसएस में निवेश कर सकती हैं। एनएससी से मिलने वाले इंटरेस्ट पर टैक्सपेयर्स को स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ता है। ईएलएस से मिले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी रेट से टैक्स लगता है। हालांकि, एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं लगता है।