ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स जल्द अपने प्रोविडेंट फंड का एक हिस्सा यूपीआई के जरिए निकाल सकेंगे। सब्सक्राइबर्स के बैंक अकाउंट में डायरेक्ट ट्रांसफर की यह सुविधा इस साल अप्रैल तक शुरू हो सकती है। एक सीनियर अधिकारी ने पीटीआई को यह जानकारी दी।
ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स जल्द अपने प्रोविडेंट फंड का एक हिस्सा यूपीआई के जरिए निकाल सकेंगे। सब्सक्राइबर्स के बैंक अकाउंट में डायरेक्ट ट्रांसफर की यह सुविधा इस साल अप्रैल तक शुरू हो सकती है। एक सीनियर अधिकारी ने पीटीआई को यह जानकारी दी।
ईपीएफ का एक हिस्सा यूपीआई के जरिए निकाला जा सकेगा
सूत्र के मुताबिक, लेबर मिनिस्ट्री एक सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसके तहत एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड (EPF) का एक खास हिस्सा ब्लॉक रहेगा, जबकि बाकी हिस्सा यूपीआई के जरिए विड्रॉल के वास्ते उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सब्सक्राइबर यह देख सकेगा कि वह कितना पैसा यूपीआई के जरिए अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर सकता है।
सब्सक्राइबर को ट्रांजेक्शन के लिए यूपीआई पिन का इस्तेमाल करना होगा
सूत्र ने बताया कि यह सिस्टम कैसे काम करेगा। उन्होंने कहा कि सब्सक्राइबर्स ट्रांजेक्शन के लिए अपने लिंक्ड यूपीआई पिन का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पैसे का ट्रांसफर आसानी और सुरक्षित तरीके से हो जाएगा। उन्होंने कहा, "पैसा एक बार बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होने के बाद सब्सक्राइबर उसे अपनी मर्जी के हिसाब से इस्तेमाल कर सकेगा। वह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पेमेंट कर सकेगा या बैंक एटीएम से पैसे निकाल सकेगा।"
इस सुविधा के शुरू होने से 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स को होगा फायदा
अभी एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, ईपीएफओ की इस सुविधा से करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स को फायदा होगा। अभी ईपीएफ के सब्सक्राइबर्स को पैसे निकालने के लिए विड्रॉल क्लेम फाइल करना होता है। इसमें काफी समय लगता है। इससे ऑर्गेनाइजेशन पर काम का बोझ भी बढ़ता है।
मौजूदा ऑटो सेटलमेंट सिस्टम में क्लेम तीन दिन में सेटल होता है
मौजूदा ऑटो सेटलमेंट सिस्टम के तहत विड्रॉल क्लेम्स इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तीन दिन के अंदर सेटल हो जाते हैं। इसमें किसी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती है। इस तरीके से विड्रॉल की लिमिट पहले ही 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इससे बीमारी के इलाज, एजुकेशन, शादी और हाउसिंग जैसी जरूरतों के लिए पैसे जल्द सब्सक्राइबर के बैंक अकाउंट में आ जाता है।
ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को सीधे पैसे निकालने की इजाजत नहीं दे सकता
सूत्र ने बताया कि ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को ईपीएफ अकाउंट्स से सीधे पैसे निकालने की इजाजत नहीं दे सकता, क्योंकि उसके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है। हालांकि, सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बैंकों की तरह करना चाहती है। इससे ईपीएफ सब्सक्राइबर्स को काफी सुविधा होगी। यूपीआई के जरिए पैसे निकालने की सुविधा शुरू होने से ईपीएफओ पर काम का बोझ भी घटेगा।
ईपीएफओ हर साल 5 करोड़ से ज्यादा क्लेम को प्रोसेस करता है
ईपीएफओ हर साल 5 करोड़ से ज्यादा क्लेम को प्रोसेस करता है। इसमें से ज्यादातर ईपीएफ विड्रॉल से जुड़े होते हैं। अभी ईपीएफओ के करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। ऑर्गेनाइजेशन ने कोविड के दौरान एडवान्स क्लेम्स के ऑनलाइन ऑटो-सेटलमेंट की सुविधा शुरू की थी। हालांकि, सब्सक्राइबर्स को अभी भी पैसे निकालने के लिए क्लेम फाइल करना पड़ता है। यूपीआई आधारित सिस्टम शुरू होने से इसकी जरूरत खत्म हो जाएगी।
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