EPF पर 8.25% मिलता है ब्याज, लेकिन असली रिटर्न मिलता है 11.8%, जानिये कैसे

अगर आप भी EPF पर मिलने वाले 8.25% ब्याज को साधारण रिटर्न समझकर नजरअंदाज करते हैं, तो शायद आप इसकी असली ताकत नहीं जानते। टैक्स बचत और टैक्स-फ्री ब्याज जैसे फायदों को जोड़कर देखें तो EPF का रिटर्न 30% टैक्स स्लैब वाले कर्मचारियों के लिए करीब 11.8% तक पहुंच सकता है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 6:00 PM
अगर आप भी EPF पर मिलने वाले 8.25% ब्याज को साधारण रिटर्न समझकर नजरअंदाज करते हैं, तो शायद आप इसकी असली ताकत नहीं जानते।

अगर आप भी EPF पर मिलने वाले 8.25% ब्याज को साधारण रिटर्न समझकर नजरअंदाज करते हैं, तो शायद आप इसकी असली ताकत नहीं जानते। टैक्स बचत और टैक्स-फ्री ब्याज जैसे फायदों को जोड़कर देखें तो EPF का रिटर्न 30% टैक्स स्लैब वाले कर्मचारियों के लिए करीब 11.8% तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि कई एक्सपर्ट EPF को नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे मजबूत और सेफ निवेश विकल्पों में गिनते हैं।

कई नौकरीपेशा लोग EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि पर मिलने वाले 8.25 प्रतिशत ब्याज को देखकर इसे साधारण निवेश मान लेते हैं। कुछ लोग इसकी तुलना म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार से करते हैं और मानते हैं कि EPF का रिटर्न कम है। लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि EPF का वास्तविक फायदा केवल ब्याज दर देखकर नहीं समझा जा सकता। एक्सपर्ट के अनुसार खासकर पुराने टैक्स रिजीम में 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाले कर्मचारियों के लिए EPF का रिटर्न करीब 11.8 प्रतिशत तक महसूस हो सकता है। इसकी वजह EPF के साथ मिलने वाले टैक्स बेनेफिट हैं।

कैसे बढ़ जाता है रिटर्न?


मान लीजिए कोई कर्मचारी EPF में 1 लाख रुपये का योगदान करता है। यदि वह पुराने टैक्स रिजीम में है और 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आता है, तो उसे धारा 80C के तहत इस निवेश पर करीब 30,000 रुपये तक की टैक्स सेविंग मिल सकती है। इसका मतलब यह हुआ कि कर्मचारी की जेब से सिर्फ 70,000 रुपये का प्रभाव पड़ा, लेकिन ब्याज पूरे 1 लाख रुपये पर मिलता रहा।

EPF की मौजूदा 8.25 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से 1 लाख रुपये पर 8,250 रुपये का ब्याज मिलेगा। यदि इसे वास्तविक 70,000 रुपये के निवेश के मुकाबले देखा जाए, तो प्रभावी रिटर्न करीब 11.8 प्रतिशत बैठता है। यही कारण है कि कई लोग EPF के असली लाभ को समझ नहीं पाते।

EPF की सबसे बड़ी ताकत: EEE टैक्स लाभ

EPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी का निवेश माना जाता है। इसका मतलब है कि निवेश के समय टैक्स छूट मिलती है। जमा अमाउंट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री रहता है। 5 साल की लगातार सर्विस के बाद निकालना भी टैक्स फ्री होता है। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में बहुत कम निवेश ऑप्शन हैं जो ये तीनों फायदे एक साथ देते हैं।

FD से क्यों बेहतर है EPF?

पहली नजर में EPF और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दोनों सुरक्षित निवेश लग सकते हैं। लेकिन टैक्स के बाद तस्वीर बदल जाती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को FD पर 8.25 प्रतिशत ब्याज मिलता है। वह 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आता है, तो टैक्स कटने के बाद उसका वास्तविक रिटर्न लगभग 5.8 प्रतिशत ही रह जाता है। इसके विपरीत EPF पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है, जिससे लंबे समय में ज्यादा संपत्ति बनाने में मदद मिलती है।

नए टैक्स रिजीम में भी फायदा

हालांकि नए टैक्स रिजीम में EPF योगदान पर धारा 80C की छूट नहीं मिलती, फिर भी EPF की ब्याज आय और निकासी पर टैक्स नहीं लगता। यही वजह है कि यह अभी भी एक आकर्षक रिटायरमेंट निवेश बना हुआ है। हालांकि वित्त कानून के अनुसार कर्मचारी के 2.5 लाख रुपये से अधिक वार्षिक योगदान पर मिलने वाले ब्याज के एक हिस्से पर टैक्स लग सकता है।

बिना जोखिम के मिलता है रिटर्न

म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश करने के लिए रिसर्च, निगरानी और जोखिम उठाना पड़ता है। वहीं EPF में पैसा हर महीने अपने आप जमा होता है और उस पर ब्याज भी स्वतः जुड़ता रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें बाजार की उठापटक का जोखिम नहीं होता। इसलिए EPF को नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद और मजबूत रिटायरमेंट निवेश विकल्पों में गिना जाता है।

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