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EPF Rule Change: ₹15000 से ज्यादा सैलरी पर EPF कटौती अब होगी वैकल्पिक, सरकार ने बदले नियम

EPF Rule Change: EPF के नए नियम नौकरीपेशा लोगों की बचत पर बड़ा असर डाल सकते हैं। अब ₹15,000 से ज्यादा बेसिक सैलरी पर PF कटौती अनिवार्य नहीं रहेगी। जानिए नए नियम कैसे काम करेंगे, किसे फायदा होगा और रिटायरमेंट फंड पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Jul 02, 2026 पर 10:33 PM
EPF Rule Change: ₹15000 से ज्यादा सैलरी पर EPF कटौती अब होगी वैकल्पिक, सरकार ने बदले नियम
पुराने Employees' Provident Funds Scheme, 1952 के तहत 15,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF में शामिल होना जरूरी था।

EPF Rule Change: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने Employees' Provident Funds Scheme, 2026 लागू कर दिया है। नए नियमों के तहत 15,000 रुपये से ज्यादा मंथली बेसिक सैलरी पर EPF का योगदान अब वैकल्पिक (Optional) होगा। यानी अब कर्मचारी और कंपनी चाहें तो सिर्फ तय वेतन सीमा तक EPF जमा करें या फिर उससे ज्यादा सैलरी पर भी योगदान जारी रखें।

पहले क्या था नियम?

पुराने Employees' Provident Funds Scheme, 1952 के तहत 15,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF में शामिल होना जरूरी था।

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा होती थी और वह EPF में शामिल हो जाता था, तो कर्मचारी और कंपनी दोनों को उसकी पूरी बेसिक सैलरी पर EPF का योगदान देना पड़ता था। जैसे कि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है। पुराने नियम के तहत अगर वह ज्यादा वेतन पर EPF में शामिल था, तो EPF की कटौती पूरे 50,000 रुपये के आधार पर होती थी।

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