EPF Scheme 2026: सैलरी अधिक लें या पीएफ खाते में ज्यादा पैसे, फैसले से पहले करें ये कैलकुलेशन, नहीं तो लगेगा तगड़ा शॉक

EPF Scheme 2026: एंप्लॉयीज को नए नियमों के तहत अब अपनी सैलरी बढ़ाने का विकल्प मिला है लेकिन इससे पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम हो सकता है। जानिए कि नए नियमों से रिटायरमेंट कॉर्पस पर कितना असर पड़ सकता है तो किन एंप्लॉयीज के लिए यह विकल्प चुनना बेहतर है तो किन लोगों को इसे चुनने पर झटका लग सकता है

अपडेटेड Jul 05, 2026 पर 1:19 PM
EPF Scheme 2026: अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा।

EPF Scheme 2026: नए लेबर कोड के तहत एंप्लॉयीज को अपना पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन एक लेवल तक कम करने की सहूलियत मिल रही है ताकि वह अपनी मंथली टेक-होम सैलरी बढ़ा सकें। हालांकि इससे सैलरी तुरंत अधिक मिल तो जाएगी लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटायरमेंट के बनाया जा रहा पैसा काफी कम हो सकता है। ऐसे में आखिरी फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि क्या जितनी सैलरी अधिक मिलेगी, वह सही तरीके से निवेश करेंगे या खर्च हो जाएगा। वित्तीय जानकारों के मुताबिक बस इसी से तय होगा कि एंप्लॉयीज को सैलरी अधिक लेनी चाहिए या पीएफ खाते में अधिक पैसा जाते देने रहना चाहिए।

नए नियमों से कैसे बढ़ जाएगी टेक-होम सैलरी?

जैगल कंपनी टैक्सप्लानर के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक का कहना है कि ईपीएफ खाते में में 12% ही जमा होगा लेकिन असली मुद्दा यह है कि यह 12% सैलरी के किस हिस्से पर लागू होता है। पहले के फ्रेमवर्क कई कंपनियां पीएफ को या तो एक्चुअल बेसिक सैलरी पर काटते थे या हर महीने स्टैटुअरी वेज सीलिंग ₹15,000 थी, जिससे कम से कम हर महीने पीएफ खाते में ₹1,800 जाता ही था। अब नए लेबर कोड फ्रेमवर्क में 12% का अनिवार्य कॉन्ट्रिब्यूशन अभी भी सिर्फ स्टैटुअर वेज सीलिंग तक ही लागू है। इस सीमा से ऊपर सैलरी पर कॉन्ट्रिब्यूशन आमतौर पर वालंटरी होता है और यह एंप्लॉयर-एंप्लॉयीज की आपसी सहमति से तय होता है। ऐसे में जहां एंप्लॉयीज हायर सैलरी बैस पर पीफ खाते में पैसे डाल रहे हैं, वहां एंप्लॉयर-एंप्लॉयी मिलकर इसे हर महीने ₹1800 तक सीमित रख सकते हैं और टेक-होम सैलरी बढ़ा सकते हैं।


किसके लिए सैलरी बढ़ाने का विकल्प शानदार नहीं

अगर पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करने का विकल्प चुनते हैं तो टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी लेकिन रिटायरमेंट कॉर्पस कम हो जाएगा। प्रोमोर फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर और नेटवर्क एफपी की को-फाउंडर निशा सांघवी का कहना है कि कुछ खास एंप्लॉयीज के लिए सैलरी बढ़वाने का विकल्प आकर्षक नहीं है-

जो एंप्लॉयीज अपने रिटायरमेंट की मुख्य बचत को लेकर ईपीएफ पर निर्भर हैं।

जिनकी कंपनियां पूरी बैसिक सैलरी का 12% हिस्सा पीएफ खाते में डालती हैं क्योंकि कम पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन चुनने पर कंपनियां भी स्टैटुअरली लिमिट से ऊपर कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर सकती हैं और एंप्लॉयर-फंडेड रिटायर बेनेफिट खत्म हो जाएगा।

40 वर्ष से अधिक की उम्र के एंप्लॉयीज क्योंकि उनकी कमाई की उम्र कम रह जाती है तो पीएफ खाते में जमा घटती है तो असर बहुत बड़ा होता है।

जिनकी बचत की आदत नहीं या कोई इमरजेंसी फंड नहीं है।

मार्केट के उतार-चढ़ाव से घबराने वाले निवेशक। ईपीएफ पर अभी भी सालाना 8.2% की दर से ब्याज मिल रहा है, जो अधिकतर सब्सक्राइबर्स के लिए टैक्स-एफिसिएंट बना हुआ है और इतना अधिक ब्याज देने वाला सुरक्षित फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स मुश्किल है।

कितना पड़ेगा असर?

अब बात करते हैं टेक-होम सैलरी अधिक करने का रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर की। इसे लेकर निशा सांघवी का कहना है कि मान लीजिए किसी एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी ₹50 हजार है और 12% के हिसाब से हर महीने ईपीएफ खाते में ₹6 हजार जमा होता है। नए नियमों के तहत सिर्फ ₹1800 जमा करना अनिवार्य है तो इसे चुनने पर हर महीने सैलरी ₹4200 बढ़ जाएगी लेकिन अगर यही ईपीएफ खाते में जाता है तो 8.25% की दर से 25 साल में लगभग ₹41-₹42 लाख का फंड तैयार कर देता। निशा का कहना है कि अगर कंपनी ने भी अपना वालंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन बंद कर दिया तो रिटायरमेंट कॉर्पस को झटका लगभग दोगुना बढ़कर लगभग ₹80 लाख से अधिक हो सकता है। इसके अलावा टैक्स का एंगल है भी है। टेक-होम सैलरी बढ़ती है तो उस हिसाब से टैक्स देनदारी भी बढ़ सकती है, जब ईपीएफ में रखा पैसा अधिकतर टैक्स-फ्री ही होता है।

तो किसके लिए बेहतर है पीएफ खाते में जमा कम करना?

निशा के मुताबिक कुछ ही मामलों में पीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन में कटौती करना सही हो सकता है। जैसे कि अगर किसी एंप्लॉयीज को 12-14% की अधिक दर से लोन की किश्त भरनी है तो इसका प्रीपेमेंट ईपीएफ के 8.25% की दर से ब्याज हासिल करने से बेहतर है। इसके अलावा ऐसे एंप्लॉयीज के लिए भी ईपीएफ खाते में कॉन्ट्रिब्यूशन कम करना बेहतर है, जो टेक-होम सैलरी को बेहतर तरीके से निवेश कर सकें।

सिर्फ ₹6000 की SIP से हर महीने पाएं ₹6 लाख की पेंशन, साथ में ₹2.64 करोड़ का बोनस! ये है सीक्रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।