EPF Scheme 2026: PF के नियमों में बड़ा बदलाव! निकासी से लेकर इंश्योरेंस तक... जानें क्या-क्या बदला
New PF Withdrawal Rules: यह नया ढांचा पुराने ईपीएफ स्ट्रक्चर की जगह लेगा और देश में नए लेबर कोड्स को लागू करने की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। राहत की बात यह है कि सैलरीड क्लास के लिए पीएफ कंट्रीब्यूशन का मूल ढांचा पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन EPFO के कामकाज, पीएफ निकासी और डिजिटल कंप्लायंस को पूरी तरह से अपग्रेड कर दिया गया है। समझिए आपकी जेब और पीएफ अकाउंट पर क्या असर पड़ेगा
देश में नए लेबर कोड्स को लागू करने की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है
EPF Scheme 2026: देश के प्रोविडेंट फंड (PF) सिस्टम में एक बहुत बड़ा बदलाव हो चुका है। केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत आधिकारिक तौर पर कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। यह नया ढांचा पुराने ईपीएफ स्ट्रक्चर की जगह लेगा और देश में नए लेबर कोड्स को लागू करने की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
राहत की बात यह है कि सैलरीड क्लास के लिए पीएफ कंट्रीब्यूशन का मूल ढांचा पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन EPFO के कामकाज, पीएफ निकासी और डिजिटल कंप्लायंस को पूरी तरह से अपग्रेड कर दिया गया है। आइए समझते हैं कि इस नई योजना से आपकी जेब और पीएफ अकाउंट पर क्या असर पड़ेगा।
1. PF से पैसा निकालना हुआ आसान
नए ईपीएफ स्कीम 2026 के तहत कर्मचारियों के लिए अपने पीएफ फंड तक पहुंच को काफी सरल और सुलभ बना दिया गया है।
इन कामों के लिए निकाल सकेंगे एडवांस: बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर खरीदने या निर्माण जैसे जरूरी कामों के लिए अब कर्मचारी आसानी से पार्शियल विड्रॉल कर सकेंगे। हालांकि, यह निकासी सरकार द्वारा तय की गई कुछ आसान शर्तों और अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता के आधार पर की जा सकेगी।
2. डिजिटल वेरिफिकेशन हुआ सख्त, क्लेम सेटलमेंट होगा फास्ट
पीएफ दावों को तेजी से निपटाने और वेरिफिकेशन में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य और मजबूत किया गया है। अब क्लेम प्रोसेस को तेज करने के लिए कर्मचारियों को पैन, आधार और आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट की सही डिटेल्स देना जरूरी होगा। इससे पीएफ ट्रांसफर या विड्रॉल के समय होने वाले रिजेक्शन की समस्या खत्म हो जाएगी।
3. फ्री इंश्योरेंस का फायदा रहेगा जारी
नई गाइडलाइंस में पीएफ अकाउंट के साथ मिलने वाले मुफ्त एंप्लॉयीज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) के फायदों को पहले की तरह ही बरकरार रखा गया है। अगर नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को न्यूनतम ₹50000 से लेकर अधिकतम ₹7 लाख तक का इंश्योरेंस क्लेम मिलता है। यह रकम कर्मचारी की आखरी सैलरी और पीएफ बैलेंस की हिस्ट्री के आधार पर तय की जाती है।
4. पीएफ कटौती में कोई बदलाव नहीं
आम नौकरीपेशा लोगों के लिए हर महीने होने वाली पीएफ कटौती के गणित में कोई बदलाव नहीं किया गया है:
12% का नियम: कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान पहले की तरह ही बेसिक सैलरी और डीए का 12-12 प्रतिशत बना रहेगा।
सैलरी सीलिंग: स्कीम में साफ किया गया है कि वैधानिक वेतन सीमा से अधिक कमाने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य योगदान केवल सीलिंग अमाउंट तक ही लागू होगा। हालांकि, कर्मचारी चाहें तो स्वैच्छिक रूप से अपनी बढ़ी हुई सैलरी पर ज्यादा योगदान दे सकते हैं।
5. कंपनियों के लिए कड़े नियम और राहत योजनाएं
नियोक्ताओं के लिए डिजिटल रिपोर्टिंग और पेमेंट्स को काफी कड़ा कर दिया गया है। कंपनियों को अब अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक पीएफ पेमेंट करने होंगे और एंप्लॉयीज के रिकॉर्ड को डिजिटली अपलोड करना होगा। दूसरी ओर, कंपनियों के पुराने विवादों और कंप्लायंस गैप को सुधारने के लिए सरकार ने तीन बड़ी राहत योजनाओं की भी घोषणा की है:
EY इंडिया में पीपल एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर पुनीत गुप्ता ने कहा कि, ईपीएफ स्कीम 2026 का लागू होना भारत में लेबर कोड्स के क्रियान्वयन की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। यह कदम देश के सोशल सिक्योरिटी सिस्टम को ज्यादा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन, पारदर्शी और आसान बनाने की सरकारी नीति को दर्शाता है।'