EPF से पैसा निकालने की ये भूल मत करें, नहीं तो लगेगा तगड़ा फटका; देख लें एक्सपर्ट का ये पूरा कैलकुलेशन

EPF Withdrawal Rules: एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि EPF कोई साधारण सेविंग्स अकाउंट या पिग्गी बैंक नहीं है, जिसे जिंदगी में थोड़ा सा खर्च बढ़ते ही खाली कर लिया जाए। सीधे शब्दों में कहें तो 28 साल की उम्र में निकाला गया आपका हर ₹1, रिटायरमेंट के समय आपके ₹12 के बराबर होता है

अपडेटेड Jun 21, 2026 पर 12:33 PM
EPFO फिलहाल पीएफ कंट्रीब्यूशन पर 8.25 फीसदी की शानदार सालाना ब्याज दर दे रहा है

EPF Withdrawal Rules: नौकरीपेशा लोगों के लिए एंप्लॉय प्रोविडेंट फंड (EPF) रिटायरमेंट फंड जुटाने का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जरिया है। लेकिन कई बार लोग किसी छोटे-मोटे खर्च या इमरजेंसी के नाम पर पीएफ खाते से कुछ पैसे निकाल लेते हैं। अगर आप भी ऐसा करने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए! वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक, युवावस्था में पीएफ से निकाली गई एक छोटी सी रकम आपके बुढ़ापे के बड़े फंड  फंड में बड़ा डेंट कर सकती है।

आंकड़ों के गणित को समझें तो अगर आप 28 साल की उम्र में अपने ईपीएफ खाते से सिर्फ ₹1 लाख निकालते हैं, तो रिटायरमेंट यानी 60 वर्ष के वक्त आपको करीब ₹11.78 लाख का सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्यों इतना महंगा पड़ता है पीएफ से पैसा निकालना?


इस भारी नुकसान के पीछे सबसे बड़ी वजह है कंपाउंडिंग यानी चक्रवर्धि ब्याज की ताकत। पीएफ में आपका पैसा लंबे समय तक लॉक रहता है, जिससे उस पर मिलने वाला ब्याज अगले साल मूलधन में जुड़ जाता है और फिर उस ब्याज पर भी ब्याज मिलता है।

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फिनटेक प्लेटफॉर्म कस्टोडियन लाइफ के संस्थापक कुणाल काबरा के मुताबिक, 'समय से पहले ईपीएफ से की गई हर निकासी आपके रिटायरमेंट फंड पर एक स्थायी टैक्स की तरह है। आप जितनी कम उम्र में पैसा निकालेंगे, यह नुकसान उतना ही बड़ा होता जाएगा। कंपाउंडिंग का मल्टीप्लायर इफेक्ट दोनों तरह से काम करता है। यह धैर्य के साथ संपत्ति बनाता भी है, और समय से पहले पैसा बड़ा नुकसान भी कराता है।'

₹1 लाख की निकासी से ₹11.78 लाख का घाटा कैसे?

ईपीएफओ फिलहाल पीएफ कंट्रीब्यूशन पर 8.25 फीसदी की शानदार सालाना ब्याज दर दे रहा है। कुणाल काबरा ने एक उदाहरण के जरिए समझाया कि कैसे एक छोटी सी निकासी आपके अंतिम कॉर्पस को कम कर देती है।

मान लीजिए एक कर्मचारी 23 साल की उम्र में नौकरी शुरू करता है और 58 साल की उम्र तक ईपीएफ में योगदान देता है। वह पहले 10 साल तक ₹5000 प्रति माह निवेश करता है। अगले 10 साल ₹10000 प्रति माह, फिर अगले 10 साल ₹20000 प्रति माह और आखिरी 5 साल ₹25000 प्रति माह डालता है। अगर वह कर्मचारी पूरे 35 साल के करियर में एक रुपया भी नहीं निकालता, तो रिटायरमेंट पर उसका कुल फंड लगभग ₹2.11 करोड़ हो जाएगा।

लेकिन अगर वह बीच में निकासी करता है तो:

₹1 लाख निकालने पर: अगर वह 28 साल की उम्र में सिर्फ ₹1 लाख निकाल लेता है, तो रिटायरमेंट पर उसका फाइनल फंड करीब ₹11.78 लाख कम हो जाएगा।

₹5 लाख निकालने पर: अगर वह किसी बड़े खर्च के लिए ₹5 लाख निकाल लेता है, तो रिटायरमेंट के समय उसका कुल फंड करीब ₹60 लाख कम हो जाएगा।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह: पीएफ को सेविंग्स अकाउंट न समझें

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि EPF कोई साधारण सेविंग्स अकाउंट या पिग्गी बैंक नहीं है, जिसे जिंदगी में थोड़ा सा खर्च बढ़ते ही खाली कर लिया जाए। सीधे शब्दों में कहें तो 28 साल की उम्र में निकाला गया आपका हर ₹1, रिटायरमेंट के समय आपके ₹12 के बराबर होता है।

इसलिए, जब तक कोई बेहद गंभीर मेडिकल इमरजेंसी या बेहद जरूरी परिस्थिति न हो, अपने पीएफ फंड को बिल्कुल न छुएं। शॉर्ट-टर्म की जरूरतों के लिए एक अलग इमरजेंसी फंड बनाकर रखें, ताकि आपके बुढ़ापे की लाठी सुरक्षित रहे।

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