EPFO: इंश्योरेंस फायदों में किये बड़े बदलाव, लाखों कर्मचारियों को पहले साल से मिलना शुरू हो जाएंगे फायदे

EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए EPF पर 8.25% ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया है। यह दर पिछले साल की तरह ही रहेगी। केंद्रीय बोर्ड (CBT) की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें इंश्योरेंस लाभों में सुधार भी शामिल हैं

अपडेटेड Mar 04, 2025 पर 7:09 PM
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EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए EPF पर 8.25% ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया है।

EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए EPF पर 8.25% ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया है। यह दर पिछले साल की तरह ही रहेगी। केंद्रीय बोर्ड (CBT) की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें इंश्योरेंस लाभों में सुधार भी शामिल हैं। इससे हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। खासकर, जॉब के पहले साल, नौकरी छोड़ने के बाद और दो नौकरियों के बीच गैप होने पर भी इंश्योरेंस कवर का फायदा मिलेगा। ये बदलाव प्राइवेट क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित होंगे।

EPF में ब्याज और योगदान कैसे काम करता है?

EPFO ने साफ किया कि 8.25% का ब्याज भारत सरकार की मंजूरी के बाद कर्मचारियों के खाते में जमा किया जाएगा। ईपीएफ खाते में कर्मचारी और नियोक्ता (कंपनी) दोनों मिलकर योगदान देते हैं। कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12% जमा करता है। नियोक्ता भी 12% जमा करता है, लेकिन यह दो हिस्सों में बंटता है।


8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है।

3.67% ईपीएफ खाते में जोड़ा जाता है।

EPFO की इंश्योरेंस योजना (EDLI) में क्या बदलाव हुए?

EPFO की बैठक में Employees' Deposit Linked Insurance (EDLI) योजना में कुछ बड़े सुधार किए गए। यह योजना 1976 में शुरू की गई थी ताकि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को इंश्योरेंस सुरक्षा मिल सके। अब नए बदलावों से लाखों कर्मचारियों को फायदा होगा।

1. नौकरी के पहले साल में मौत पर भी इंश्योरेंस कवर

पहले, अगर किसी कर्मचारी की एक साल की नौकरी पूरी होने से पहले मौत हो जाती थी, तो उसके परिवार को इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलता था। अब अगर किसी कर्मचारी की एक साल से कम की नौकरी के दौरान मृत्यु होती है, तो परिवार को कम से कम 50,000 रुपये का इंश्योरेंस कवर मिलेगा। इससे हर साल 5,000 से ज्यादा परिवारों को मदद मिलेगी।

2. नौकरी छोड़ने के बाद 6 महीने तक इंश्योरेंस कवर मिलेगा

पहले, अगर किसी कर्मचारी की नौकरी छोड़ने के 6 महीने बाद मौत हो जाती थी, तो उसे इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलता था। अब अगर अंतिम सैलरी कटने के 6 महीने के भीतर कर्मचारी की मृत्यु होती है और उसका नाम अभी भी कंपनी के रिकॉर्ड में है, तो उसे इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा। इस बदलाव से हर साल करीब 14,000 परिवारों को फायदा मिलेगा।

3. दो नौकरियों के बीच गैप होने पर भी इंश्योरेंस मिलेगा

पहले, अगर किसी कर्मचारी ने एक नौकरी छोड़ी और दूसरी नौकरी जॉइन करने में 1-2 दिन का भी गैप हुआ, तो इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलता था।अब अगर दो नौकरियों के बीच 2 महीने तक का गैप है, तो भी कर्मचारी को इंश्योरेंस कवर मिलेगा। इससे हर साल करीब 1,000 कर्मचारियों के परिवारों को फायदा होगा।

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