EPFO New Rule: क्या आपका PF कंपनी के पीएफ ट्रस्ट में जमा होता है? ईपीएफओ ने इंट्रेस्ट रेट समेत ये नियम बदले, डिटेल में जानिए

EPFO New Rule 2026 Exempted PF Trust: EPFO ने पीएफ को लेकर नए नियम जारी किए हैं। सामान्य तौर पर कर्मचारियों का पीएफ का पैसा सीधे ईपीएफओ के पास जमा होता है लेकिन कुछ बड़ी कंपनियां अपना खुद का इन-हाउस पीएफ ट्रस्ट चलाती हैं। नए नियम के तहत अब इन प्राइवेट या निजी पीएफ ट्रस्ट्स के लिए ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड, ब्याज भुगतान, ऑनलाइन दावों और फंड मैनेजमेंट से जुड़े नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है

अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 1:38 PM
नई ईपीएफ योजना 2026 के तहत इन 7 बड़े बदलावों को जानना है बेहद जरूरी

EPFO New Rule 2026 Exempted PF Trust: देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नए नियम जारी किए हैं। सामान्य तौर पर कर्मचारियों का पीएफ का पैसा सीधे ईपीएफओ के पास जमा होता है लेकिन कुछ बड़ी कंपनियां अपना खुद का इन-हाउस पीएफ ट्रस्ट चलाती हैं।

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में अधिसूचित की गई कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 (Employees’ Provident Fund Scheme, 2026) के तहत अब इन प्राइवेट या निजी पीएफ ट्रस्ट्स के लिए ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड, ब्याज भुगतान, ऑनलाइन दावों और फंड मैनेजमेंट से जुड़े नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है।

क्या होता है Exempted PF Trust?


कुछ बड़ी कंपनियां सरकार से विशेष अनुमति प्राप्त करके अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि का प्रबंधन ईपीएफओ (EPFO) में पैसा जमा करने के बजाय अपने खुद के इन-हाउस ट्रस्ट के जरिए करती हैं। इन्हें 'एग्जेंप्टेड पीएफ ट्रस्ट' कहा जाता है। ये ट्रस्ट हर महीने कर्मचारियों और कंपनी के हिस्से का योगदान अपने पास जमा करते हैं और सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज दर की पेशकश करते हैं। जब कोई कर्मचारी ऐसी कंपनी छोड़ता है तो उसे अपना पैसा अपने सामान्य ईपीएफ खाते में ट्रांसफर करना होता है।

नई ईपीएफ योजना 2026 के तहत किए गए ये 7 मेन बदलाव

1- ईपीएफओ के बराबर या उससे बेहतर लाभ देना अनिवार्य

नए नियमों के तहत इन निजी ट्रस्टों के लिए अनुपालन को बहुत कड़ा कर दिया गया है। छूट प्राप्त करने के लिए यह सबसे जरूरी शर्त है कि ये ट्रस्ट अपने लाभार्थियों को ईपीएफ योजना के तहत मिलने वाले लाभों के बराबर या उससे बेहतर लाभ प्रदान करें।

2- बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का गठन जरूरी

छूट प्राप्त कंपनी के लिए 'बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज' का गठन करना अनिवार्य होगा। यह ट्रस्ट सदस्यों के पैसे के प्रबंधन और उनके रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होगा।

3- ब्याज दर पर लगाई गई सीमा

नए नियमों में पीएफ ट्रस्टों द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक, ये ट्रस्ट अपने सदस्यों को केंद्र सरकार द्वारा घोषित आधिकारिक ब्याज दर से 200 बेसिस पॉइंट्स (2 प्रतिशत अंक) से अधिक ब्याज नहीं दे सकते हैं। यानी ब्याज दर पर एक ऊपरी सीमा तय कर दी गई है।

4- डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन क्लेम हुए अनिवार्य

सभी पीएफ ट्रस्टों के लिए अब इलेक्ट्रॉनिक खाते रखना, वार्षिक स्टेटमेंट जारी करना, कर्मचारियों को ऑनलाइन बैलेंस चेक करने की सुविधा देना और इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न फाइल करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा कर्मचारी पीएफ निकासी, ट्रांसफर और एडवांस के लिए ईपीएफओ द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप से क्लेम कर सकेंगे।

5- हर साल अनिवार्य वार्षिक ऑडिट

इन पीएफ ट्रस्टों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सभी खातों का हर साल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा अनिवार्य रूप से ऑडिट किया जाए।

6- नियोक्ता की रहेगी पूरी जिम्मेदारी

ट्रस्ट के प्रशासनिक खर्चों को संभालना, ट्रस्ट को होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई करना, समय पर पीएफ योगदान को ट्रांसफर करना और सभी नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करना पूरी तरह से नियोक्ता (कंपनी) की जिम्मेदारी होगी।

7- हमेशा के लिए नहीं मिलेगी छूट

नए नियमों के अनुसार, कंपनियों को मिलने वाली यह छूट अब अनिश्चितकाल या ओपन-एंडेड नहीं होगी। शुरुआत में यह छूट केवल तीन वर्षों के लिए वैध होगी। अगर कंपनियां सभी शर्तों को पूरा करना जारी रखती हैं तभी इसको रीन्यू किया जाएगा। नियमों का लगातार उल्लंघन या गैर-अनुपालन करने पर इस छूट को रद्द भी किया जा सकता है।

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