पर्यावरण को लेकर जागरूकता निवेशकों में भी बढ़ी है। इनवेस्टर्स ऐसी कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, जो पर्यावरण की चिंता करती हैं। म्यूचुअल फंडों की इनवायरमेंटल सोशल गवर्नेंस (ESG) स्कीम ऐसी ही कंपनियों के शेयरों में निवेश करती है। इनवेस्टर्स कुछ पैसा ईएसजी स्कीम में लगा रहे हैं। लेकिन, कोई कंपनी पर्यावरण की कितनी परवाह करती है, यह पता लगाना आसान नहीं है। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें ईएसजी से संबंधित जानकारियां निवेशक को कनफ्यूज कर सकती हैं। कई कंपनियां ग्रीनवॉशिंग (Greenwashing) का इस्तेमाल करती हैं। ग्रीनवॉशिंग का मतलब किसी कंपनी के अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज से जुड़े पर्यावरण के फायदों के झूठे दावों से है। CFA Institute ने इस बारे में सितंबर 2023 में एक रिपोर्ट पेश की थी।
दुनियाभर के रेगुलेटरों के सामने बड़ा चैलेंज
दुनियाभर में रेगुलेटर्स इस मसले का सामना कर रहे हैं। अमेरिकी स्टॉक मार्केट रेगुलेटर SEC ने ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें लागू होने पर इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और इनवेस्टमेंट कंपनियों को ईएसजी इनवेस्टमेंट प्रैक्टिसेज के बारे में ज्यादा जानकारी देनी होगी। रेगुलेटर की कोशिश ईएसजी से संबंधित इंफॉर्मेशन की क्वालिटी में इम्प्रूवमेंट लाना है। इंडिया में रेगुलेटर्स इस मसले से दो तरह से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे ज्यादा मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली 1000 कंपनियों के लिए बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) अनिवार्य हो गई है।
ESG इनवेस्टिंग के नए नियम 2023 में आए थे
SEBI ने BRSR रिपोर्टिंग फॉर्मैट को अपडेट किया है। इस फॉर्मैट के तहत कंपनियों को ESG के मानकों पर अपने प्रदर्शन के बारे में बताना अनिवार्य है। SEBI ने जुलाई 2023 में ESG इनवेस्टिंग के लिए म्यूचुअल फंड की स्कीम की नई कैटेगरी के लिए नियम पेश किए थे। इनमें कहा गया था कि म्यूचुअल फंडों को ESG Fund के लेबल पर ईएसजी स्ट्रेटेजी के नाम के बारे में खुलासा करना होगा।
ESG स्कीम के लिए जरूरी शर्त
ESG स्कीम को सिर्फ उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करना जरूरी है जो बीआरएसआर डिसक्लोजर स्टैंडर्ड्स का पूरी तरह पालन करती हैं। 1 अक्टूबर से लागू नियम के बाद ईएसजी स्कीम को अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट का कम से कम 65 फीसदी ऐसी कंपनियों के शेयरों में निवेश करना जरूरी है, जिन्होंने कम्प्रिहेंसिव बीआरएसआर और बीआरएसआर कोर डिसक्लोजर दिया है।
ग्रीन फंडों को लेकर कई कनफ्यूजिंग दावे
ग्रीन फंडो के नाम, उनके उद्देश्य, स्क्रीनिंग की शर्ते और असर को लेकर कई कनफ्यूजिंग दावे किए गए हैं। इसलिए रेगुलेटरी के स्तर पर हुए बदलाव के अलावा इनवेस्टमेंट मैनेजर्स को यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच करना जरूरी है कि उनके फंड से जुड़े सस्टेनेबिलिटी क्रेडेंशियल ठीक तरह से पेश किए जाए। इससे जहां एक तरफ इनवेस्टर्स को अपने ईएसजी आधारित पोर्टफोलियो के बारे में पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी, साथ ही उससे उनके फैसले लेने की प्रक्रिया में भी इम्प्रूवमेंट आएगा।
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