ETF vs Mutual Fund: आपको किसमें करना चाहिए निवेश? समझिए दोनों के फायदे और नुकसान
ETF vs Mutual Fund: ETF और म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है और निवेश के लिए कौन सा बेहतर है? लागत, SIP सुविधा, जोखिम और टैक्स नियमों के आधार पर समझिए दोनों के फायदे और नुकसान, ताकि आप अपने लक्ष्य के हिसाब से सही फैसला ले सकें।
ETF आम तौर पर किसी इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, जैसे निफ्टी 50।
ETF vs Mutual Fund: म्यूचुअल फंड की दुनिया में दो बड़े विकल्प हैं, ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और पारंपरिक म्यूचुअल फंड। दोनों में निवेशकों का पैसा इकट्ठा करके बाजार में लगाया जाता है। दोनों सेबी के नियमों के तहत चलते हैं और दोनों का मकसद संपत्ति बनाना है।
लेकिन जब आप इनमें निवेश शुरू करते हैं, तो अनुभव अलग होता है। यही अंतर आगे चलकर बड़ा फर्क पैदा करता है।
ETF और म्यूचुअल फंड में बुनियादी अंतर
ETF शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं। इन्हें डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए बाजार समय में खरीदा या बेचा जा सकता है। इनकी कीमत दिन भर बदलती रहती है।
इसके उलट म्यूचुअल फंड एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते। आप सीधे फंड हाउस या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश करते हैं। आपको दिन के अंत का NAV मिलता है। आम तौर पर दोपहर 3 बजे तक का कट ऑफ समय होता है। इसके बाद अगला कारोबारी दिन लागू होता है। यह अंतर छोटा लगता है, लेकिन निवेशक के व्यवहार पर बड़ा असर डालता है। ETF लचीलापन देते हैं। म्यूचुअल फंड अनुशासन देते हैं।
पैसिव बनाम एक्टिव स्ट्रैटजी
ETF आम तौर पर किसी इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, जैसे निफ्टी 50। वे उसी अनुपात में शेयर रखते हैं जैसा इंडेक्स में होता है। वहीं, एक्टिव म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजर फैसले लेते हैं। इसलिए प्रदर्शन काफी हद तक उनकी रणनीति और अनुभव पर निर्भर करता है। इसमें मैनेजर जोखिम भी होता है।
रिपोर्ट बताती हैं कि बड़े कैप श्रेणी में कई सक्रिय फंड लंबे समय में अपने बेंचमार्क से पीछे रह जाते हैं। ऐसे में कम लागत वाले पैसिव ETF कई निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। मिड और स्मॉल कैप में कुशल फंड मैनेजर अतिरिक्त रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन यह लगातार नहीं होता। यहां आप गारंटी नहीं, संभावना के लिए भुगतान कर रहे होते हैं।
SIP की ताकत क्या है?
भारत में SIP मॉडल बेहद लोकप्रिय है। हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है। इससे बाजार टाइम करने की जरूरत नहीं रहती और अनुशासन बना रहता है। म्यूचुअल फंड में SIP, सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान और लक्ष्य आधारित सुविधाएं आसानी से मिलती हैं। ETF में ऐसी ऑटोमेटिक स्ट्रक्चर नहीं होता। लंबी अवधि के लक्ष्य जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने के लिए यह स्ट्रक्चर अच्छा काम करता है।
लागत का लंबी अवधि पर असर
ETF कम खर्च वाले होते हैं। कई इंडेक्स ETF का खर्च अनुपात 0.05 से 0.2 प्रतिशत तक होता है। इसके मुकाबले सक्रिय फंड 0.5 से 2 प्रतिशत तक शुल्क ले सकते हैं। पहली नजर में यह अंतर छोटा लगता है, लेकिन 15 से 20 साल में यही अंतर आपके अंतिम कोष पर बड़ा असर डाल सकता है।
कम खर्च का मतलब है कि बाजार से मिलने वाला ज्यादा रिटर्न आपके पास रहता है। हालांकि ETF में ब्रोकरेज और बिड आस्क स्प्रेड भी देना पड़ता है। कम लिक्विड ETF में यह लागत चुपचाप रिटर्न घटा सकती है।
ट्रैकिंग एरर क्या है
ETF इंडेक्स को कॉपी करते हैं, लेकिन पूरी तरह समान रिटर्न नहीं दे पाते। अगर इंडेक्स 12 प्रतिशत देता है तो ETF थोड़ा कम दे सकता है। इस अंतर को ट्रैकिंग एरर कहते हैं। जितना कम ट्रैकिंग एरर, उतना बेहतर। क्योंकि इसका मतलब है कि फंड इंडेक्स को करीब से फॉलो कर रहा है।
लिक्विडिटी का फायदा और नुकसान
ETF को आप बाजार समय में तुरंत खरीद या बेच सकते हैं। यह सुविधा अनुभवी निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन यही सुविधा कई बार नुकसान भी कर देती है। बाजार गिरते ही घबराकर बेच देना आसान हो जाता है।
म्यूचुअल फंड में तुरंत एग्जिट नहीं होता। रिडेम्प्शन दिन के अंत में होता है। यह छोटी सी देरी कई निवेशकों को भावनात्मक फैसले से बचा लेती है।
टैक्स नियम क्या कहते हैं
इक्विटी ETF और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर टैक्स नियम लगभग समान हैं। एक साल से कम रखने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। एक साल से ज्यादा रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन नियम लागू होते हैं। इसमें ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है, लेकिन ETF में ब्रोकरेज और STT जैसी अतिरिक्त लागतें जुड़ सकती हैं।
जोखिम कहां से आता है
जोखिम इस बात से तय होता है कि पैसा किस एसेट क्लास में लगा है। स्मॉल कैप ETF भी जोखिम भरा हो सकता है। वहीं संतुलित हाइब्रिड म्यूचुअल फंड अपेक्षाकृत स्थिर हो सकता है। पहले एसेट एलोकेशन तय करें, फिर यह चुनें कि ETF लेना है या म्यूचुअल फंड।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।