भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन जितनी तेजी से बढ़े हैं, उतनी ही तेजी से ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी सामने आए हैं। खासकर OTP स्कैम, जहां लोग अनजाने में अपना वन-टाइम पासवर्ड (OTP) शेयर कर देते हैं और कुछ ही मिनटों में उनकी मेहनत की कमाई गायब हो जाती है। अब ऐसे पीड़ितों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने राहत भरी घोषणा की है।
RBI ने कहा है कि छोटे मूल्य की धोखाधड़ी (₹50,000 से कम) के मामलों में ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा मिलेगा। खास बात यह है कि यह मुआवजा तब भी मिलेगा जब ग्राहक ने गलती से OTP शेयर कर दिया हो। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि करीब 65% डिजिटल फ्रॉड मामलों में रकम ₹50,000 से कम होती है, और इन्हीं को ध्यान में रखते हुए यह नया ढांचा तैयार किया गया है।
नियमों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक का ₹20,000 का नुकसान हुआ है तो उसे 85% यानी ₹17,000 वापस मिलेगा। वहीं अगर नुकसान ₹50,000 का है तो अधिकतम ₹25,000 तक की भरपाई होगी। बाकी 15% राशि ग्राहक और बैंक मिलकर वहन करेंगे। यह मुआवजा RBI के Depositor Education and Awareness Fund (DEA Fund) से दिया जाएगा।
हालांकि, यह सुविधा जीवन में केवल एक बार मिलेगी। यानी किसी ग्राहक को OTP स्कैम या छोटे डिजिटल फ्रॉड में मुआवजा सिर्फ एक बार मिलेगा। RBI ने साफ किया है कि यह राहत तभी दी जाएगी जब ग्राहक की ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा न हो।
यह कदम उन लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत है जो डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। अब तक ऐसे मामलों में पैसा वापस मिलने की उम्मीद लगभग न के बराबर होती थी। RBI का यह नया नियम न सिर्फ ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएगा बल्कि डिजिटल लेन-देन को और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा।
एक बुजुर्ग व्यक्ति जिसे ऑनलाइन पेमेंट्स की ज्यादा समझ नहीं है, किसी कॉल पर OTP बता देता है और उसकी पेंशन का पैसा गायब हो जाता है। पहले वह पूरी तरह लाचार होता, लेकिन अब RBI का यह कदम उसके लिए उम्मीद की किरण है। यह नियम आम लोगों को यह भरोसा दिलाता है कि अगर वे गलती से भी ठगे गए, तो पूरी जिम्मेदारी उनकी जेब पर नहीं आएगी।