FCNR(B): खास FD, बैंक धड़ाधड़ बढ़ा रहे ब्याज दर, 13 साल बाद फिर शुरू हुई चर्चा

FCNR(B): करीब 13 साल बाद एक बार एफसीएनआर(बी) की चर्चा जोरों पर है। आरबीआई (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीतियों में ऐसा ऐलान किया कि इसका आकर्षण बढ़ गया और बैंकों ने इसके डिपॉजिट्स की दरें बढ़ानी भी शुरू कर दी। जानिए कि यह किस प्रकार की डिपॉजिट स्कीम है, इससे फायदा क्या है और इसे फिर खोला क्यों गया है

अपडेटेड Jun 11, 2026 पर 1:20 PM
FCNR(B) का मतलब फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट(बैंक) है जोकि एक प्रकार का फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट है। इसके जरिए विदेशों में रहने वाले भारतीय NRI (नॉन-रेजिडेंट इंडियन)और OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) को विदेशी करेंसी में अपनी कमाई को भारतीय बैकों में जमा करने की सहूलियत मिलती है।

बैंक समय-समय पर अपने डिपॉजिट्स रेट में बदलाव करते रहते हैं। अभी लेटेस्ट में बात करें तो पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने FCNR(B) डिपॉजिट्स की ब्याज दरों को बढ़ाकर सालाना 6.10% कर दिया और बैंक का अनुमान है कि इसमें करीब $250 करोड़ आ सकते हैं तो बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda- BoB) ने नई एफसीएनआर(बी) स्कीम लॉन्च की। कुछ बैंकों में तो इसमें 7% से अधिक दर से ब्याज मिलता है। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank),आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने इसकी दरों में बदलाव किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह है क्या और इसकी जरूरत क्यों पड़ गई और इससे किसे फायदा मिल सकता है; इन सबके जवाब यहां दिए जा रहे हैं।

क्या है FCNR(B)?

एफसीएनआर(बी) का मतलब फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट(बैंक) है जोकि एक प्रकार का फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट है। इसके जरिए विदेशों में रहने वाले भारतीय NRI (नॉन-रेजिडेंट इंडियन)और OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) को विदेशी करेंसी में अपनी कमाई को भारतीय बैकों में जमा करने की सहूलियत मिलती है। चूंकि इसमें पैसा विदेशी करेंसी के रूप में जमा होता है और उसी रूप में मेच्योर भी होता है तो रुपये और विदेशी करेंसी के बीच के उतार-चढ़ाव का इस पर असर नहीं पड़ता। साथ ही इसमें मूलधन और ब्याज पर टैक्स-फ्री का भी बेनेफिट मिलता है। इसमें डॉलर, पौंड, यूरो, कनाडाई डॉलर, ऑस्ट्रेलियन डॉलर और जापानी येन में पैसे जमा किए जा सकते हैं।


अभी क्यों शुरू हुई चर्चा

हाल ही में मौद्रिक नीतियों के ऐलान के समय आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि 30 सितंबर 2026 तक तीन से पांच साल की मेच्योरिटी वाले जो भी FCNR(B) डिपॉजिट्स शुरू किए जाएंगे, उसकी हेजिंग कॉस्ट सरकार देगी। इसे ऐसे समझें जैसे कि कोई एनआरआई अमेरिका में रहता है और उसके पास 1 लाख डॉलर हैं। ऐसे में पहले बैंक को डॉलर के रुपये में बदलने और भविष्य मुद्रा जोखिम से बचाव यानी हेजिंग की लागत उठानी पड़ती थी जिसके चलते बैंक FCNR(B) पर सीमित ब्याज देते थे। हालांकि अब सरकार यह हेजिंग कॉस्ट वहन करेगी तो बैंकों की लागत कम होगी तो वह अधिक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। इससे एनआरआई निवेशकों के लिए यह अधिक आकर्षक बन रहा है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक 10 जून 2026 से 3-4 साल तक की जमा पर 7.10% और 4-5 साल तक की जमा पर 7.00% की दर से ब्याज ऑफर कर रहा है।

इस कारण RBI ने फिर खोला स्वैप विंडो

ध्यान दें कि FCNR(B) स्कीम पहले भी चल रही थी लेकिन अब यह आरबीआई के स्वैप विंडो के चलते चर्चा में आई है यानी कि पहले बैंकों को हेजिंग कॉस्ट देनी पड़ती थी लेकिन अब स्वैप विंडो के तहत यह कॉस्ट सरकार देगी। इससे पहले साल 2013 में भी यह विंडो खुली थी। आरबीआई के ऐलान के बाद बैंकों के लिए यह विंडो 10 सितंबर 2013 में खुली थी और 30 नवंबर 2013 तक खुली रही। इसके तहत करीब $3400 करोड़ का डिपॉजिट्स आया। इस बार भी यह विंडो खुली है लेकिन चार महीने यानी करीब एक महीने अधिक समय के लिए। वैसे ध्यान दें कि उस समय आरबीआई बैंकों के साथ डॉलर-रुपया स्वैप 3.5% की निश्चित लागत पर कर रहा था। इसका मतलब है कि यह स्कीम तो लगातार चल रही है लेकिन खास अवधि में बैंकों को हेजिंग कॉस्ट पर राहत मिल रही है और आरबीआई यह राहत इसलिए दैता है ताकि देश में विदेशी मुद्रा अधिक आए और रुपये पर दबाव हल्का हो।

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