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फिक्स्ड डिपॉजिट और डेट म्यूचुअल फंड में से किसमें निवेश करना ज्यादा फायदेमंद?

इंटरेस्ट रेट जब घट रहा होता है तो डेट फंड्स का रिटर्न बढ़ जाता है। बॉन्ड की यील्ड पर इंटरेस्ट रेट में बदलाव का असर जल्द दिखता है। रेपो रेट बढ़ने पर बैंक एफडी का इंटरेस्ट रेट बढ़ाने में समय लेते हैं। वे बाजार की स्थितियों और पूंजी की अपनी जरूरत को देख इंटरेस्ट रेट में बदलाव करते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 04, 2023 पर 1:33 PM
फिक्स्ड डिपॉजिट और डेट म्यूचुअल फंड में से किसमें निवेश करना ज्यादा फायदेमंद?
1 अप्रैल, 2023 के बाद खरीदी गई बॉन्ड फंड की यूनिट्स के कैपिटल गेंस पर टैक्सपेयर के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। इससे टैक्स के लिहाज से डेट फंड और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच का फर्क बहुत हद तक खत्म हो गया है।

डेट फंड्स (Debt Funds) के टैक्स के नियम बदल गए हैं। 1 अप्रैल, 2023 के बाद खरीदी गई बॉन्ड फंड की यूनिट्स के कैपिटल गेंस पर टैक्सपेयर के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। इससे टैक्स के लिहाज से डेट फंड और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच का फर्क बहुत हद तक खत्म हो गया है। चूंकि, दोनों को निवेश के लिहाज से सुरक्षित माना जाता है, इसलिए सवाल यह है कि इनवेस्टर के लिए दोनों में से किसमें निवेश करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा? इस सवाल का जवाब पाने के लिए दोनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस के बारे में विस्तार से जानना जरूरी है।

इंटरेस्ट रेट बदलने का कितना असर?

हनी मनी फाइनेंशियल सर्विसेज के फाउंडर अनूप भैया ने कहा, "इंटरेस्ट रेट बदलने पर उसका तुरंत असर डेट फंड्स पर दिखता है। इसकी वजह यह है कि इंटरेस्ट रेट बदलते ही सेकेंडरी मार्केट में बॉन्ड यील्ड बदलने लगती है। उधर, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का इंटरेस्ट रेट बदलने में समय लगता है।"

डेट फंड्स एश्योर्ड रिटर्न ऑफर नहीं करते हैं। कई ऐसे कारण हैं, जिनका असर बॉन्ड की कीमतों पर पड़ता है। उदाहरण के लिए जब इंटरेस्ट रेट घट रहा होता है तब लॉन्ग-ड्यूरेशन डेट फंड्स का रिटर्न बढ़ जाता है। जब इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा होता है तब डेट फंड का रिटर्न घट जाता है।

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